साध्वी नीलम भारती सत्संग में प्रवचन करते हुए। आयोजक
जगाधरी। हनुमान गेट स्थित दिव्य ज्योति जागृति संस्थान आश्रम में रविवार को साप्ताहिक सत्संग का आयोजन किया गया। इस अवसर पर साध्वी नीलम भारती ने गुरु की महिमा के बारे में बताया। उन्होंने कहा कि निराकार स्वरूप परमात्मा की महिमा का गुणगान करना और उसे सुनना अपेक्षाकृत सरल है, लेकिन जब वही निराकार परमात्मा साकार रूप में गुरु बनकर धरती पर अवतरित होता है, तब उसके महत्व को समझना और उसकी शरण में जाना मनुष्य के लिए कठिन हो जाता है। इसका मुख्य कारण मनुष्य का अहंकार है, जो उसे सच्चे गुरु के महत्व को समझने से रोकता है।
साध्वी ने कहा कि गुरु महिमा उस मिष्ठान की तरह है जिसका वास्तविक स्वाद तभी जाना जा सकता है जब स्वयं उसका अनुभव किया जाए। जब तक मनुष्य आत्म साक्षात्कार के माध्यम से ब्रह्मज्ञान प्राप्त नहीं करता, तब तक वह गुरु के वास्तविक महत्व को समझ नहीं सकता। निराकार परमात्मा भले ही मनुष्य के जीवन में प्रत्यक्ष हस्तक्षेप न करें, लेकिन साकार स्वरूप में ब्रह्मनिष्ठ गुरु अपने शिष्यों को कभी स्वतंत्र नहीं छोड़ते और सत्संग के माध्यम से उनके जीवन और कर्मों को सकारात्मक दिशा प्रदान करते हैं।
साध्वी ने कहा कि सेवा और साधना के माध्यम से गुरु शिष्य के संचित कर्मों को समाप्त करने में सहायता करते हैं और अपने तपोबल व कृपा से प्रारब्ध के प्रभाव को भी कम कर देते हैं। उन्होंने कहा कि गुरु की महिमा का वर्णन करना आसान नहीं है। देव लोक की दिव्य आत्माएं भी गुरु की महिमा का पूर्ण वर्णन करने में समर्थ नहीं हैं, लेकिन जिन्हें गुरु अपने दिव्य कार्य के लिए चुन लेते हैं, उन्हें यह सौभाग्य प्राप्त होता है।
उन्होंने कहा कि मनुष्य जिस विषय पर अधिक विचार करता है, वह उसी की अभिव्यक्ति बन जाता है। इसलिए यदि हम अपने जीवन का कुछ समय गुरु महिमा के गुणगान में लगाते हैं, तो हम भी उनके दिव्य गुणों को अपने जीवन में धारण कर सकते हैं। इससे गुरु के प्रति विश्वास और समर्पण का भाव प्रगाढ़ होता है और जीवन की कठिन परिस्थितियों का सामना भी सहजता से किया जा सकता है। सत्संग कार्यक्रम के अंत में साध्वी बहनों ने सुमधुर भजनों का गायन कर संगत को भावविभोर कर दिया। श्रद्धालुओं ने भक्ति और आध्यात्मिकता से ओतप्रोत वातावरण का आनंद लिया।
साध्वी नीलम भारती सत्संग में प्रवचन करते हुए। आयोजक