संवाद न्यूज एजेंसी
यमुनानगर। विधानसभा चुनाव में मतदान करने को लेकर इस बार लगभग सभी आयु के मतदाताओं में काफी उत्साह दिखा। इस चुनाव में महिलाओं ने भी मतदान करके लोकतंत्र के महापर्व में अपनी आहुति डाली। इस चुनाव में महिला सुरक्षा, उच्च शिक्षा, महंगाई, रोजगार समेत तमाम मुद्दों पर खूब चर्चा की गई। बूथ पर वोट डालने के बाद महिलाओं ने बेबाकी से अपने मुद्दों पर बात की।
तेजली गांव की गीता का कहना है कि घर के राशन से लेकर अन्य खर्च का सारा हिसाब महिलाओं को रखना पड़ता है। काफी समय से रसोई का बजट बिगड़ा हुआ है। महंगाई इतनी बढ़ गई है कि दिनरात की मेहनत के बाद भी परिवार का गुजारा ठीक से नहीं कर पाते। इसलिए इस बार सोच समझ कर ही वोट दिया है। इस बार उस प्रत्याशी को ही वोट दिया है जो अपने वादे पूरे कर सके और गृहणियों की समस्याओं को समझे।
तारूवाला गांव की सतविंद्र कौर का कहना है कि पिछले कुछ सालों में यमुनानगर में काफी विकास हुआ है। आईटीआई, कॉलेज समेत अन्य संस्थान बने हैं। परंतु उनके गांव की मुख्य गली आज तक नहीं बनी। तालाब का सारा पानी इसी गली में एकत्रित होता है। जिस कारण बच्चों व बड़ों को दूसरी गली से चक्कर लगाकर आना-जाना करना पड़ता है। वहीं विकास के मुद्दे पर इस बार वोट दिया है। महिलाओं की सुरक्षा प्रमुख मुद्दों में से एक है।
साढौरा की शगुन अनेजा का कहना है कि सभी प्रत्याशी कई दिनों से मतदाताओं से लोक लुभावने वादे कर रहे थे। कुछ वादे तो ऐसे हैं जिन्हें पूरा करना मुमकिन नहीं। मतदाता अब जागरूक हो चुका है। इसलिए वोट डालने से पहले काफी सोच विचार किया। किसे वोट देना चाहिए और किसे नहीं इसे लेकर परिजनों से भी विचार विमर्श किया। महिलाओं को लेकर सभी वादे तो करते हैं लेकिन कोई उन्हें पूरा नहीं करता, जिससे वादे पूरे होने की उम्मीद है उसे ही वोट दिया है।
चेतना का कहना है कि वह पढ़ाई कर रही है। उच्च शिक्षा प्राप्त करना लड़कियों के लिए बड़ी चुनौती है। तकनीकी शिक्षा के लिए लड़कियों को गांव से दूर शहर में या फिर अन्य जिलों में जाना पड़ता है। साथ ही लड़कियां घर से कॉलेज आने-जाने में असुरक्षित महसूस करती हैं। जो प्रत्याशी सुरक्षा देने और लड़कियों को अच्छी शिक्षा देने में समर्थ लगा उसे ही वोट दिया है। वैसे भी यह उसका पहला मतदान था। इसलिए काफी सोच-विचार करना पड़ा।
आरती धीमान का कहना है कि उसने इस विधानसभा चुनाव में पहली बार मतदान किया है। प्रत्याशी सारी सुविधाएं मुफ्त में देने की बात तो कई दिनों से कर रहे थे, लेकिन महिला सुरक्षा, उच्च शिक्षा पर किसी ने कोई बात नहीं की। पढ़ाई पूरी करने के बाद स्थायी रोजगार भी बड़ा मुद्दा रहा। आज उच्च शिक्षा प्राप्त करने के बाद भी युवा बेरोजगार घूम रहे हैं। इसलिए मतदान करने से पहले काफी सोच विचार किया गया।