यमुनानगर। गर्मी से राहत पाने के लिए लोग पश्चिमी यमुना नहर में सुबह-शाम डुबकी लगाने पहुंच रहे हैं, लेकिन ये सुकून की डुबकी जान पर आफत बन सकती है।
प्रशासन की ओर से नहर से लगते घाटों और किनारों पर सुरक्षा के मद्देनजर कोई प्रबंध नहीं किए गए। ऐसे में तैरना न जानने वाले के लिए यहां नहाना जान जोखिम में डालने समान है। फिर भी तैराकी न जानने के बावजूद युवा और किशोर नहर में डुबकी लगा रहे हैं। प्रशासन की उदासीनता और अभिभावकों के जागरूक न होने से आए साल दर्जनों युवा नहर में डूब जाते हैं।
न कोई खतरे का साइन बोर्ड, न घाटों के चारों ओर स्पोट व जंजीरें : गंगा दशहरे के अवसर पर रविवार को थाना जठलाना क्षेत्र के गुमथला घाट पर तीन युवकों की डूबने से मौत हो गई थी। इस दौरान घाटों पर प्रशासन की ओर से सुरक्षा के पुख्ता प्रबंध न किए जाने की बात सामने आई। ठीक ऐसा ही असुरक्षा का आलम पश्चिमी यमुना नहर की पटरी पर चिट्टा मंदिर रोड पर दड़वा, श्रीशनि मंदिर, चिट्टा मंदिर और बाडीमाजरा पुल के समीप हनुमान मंदिर और जगाधरी रेलवे पुल के समीप जमना गली स्थित घाट का है।
पांचों घाटों पर चारों ओर न तो कोई स्पोट है और न ही नहाते वक्त पकड़ने के लिए जंजीरें लगी हैं। ऐसे में नहर में पानी के तेज बहाव के कारण हर समय हादसे की आशंका रहती है। इसी प्रकार अधिकतर लोग नहर के किनारों पर भी स्नान करते हैं, जिन्हें वहां कोई खतरे का साइन बोर्ड न होने से किनारों के पास नहर की गहराई का कुछ पता नहीं लग पाता है। इसी के चलते कई लोगों की नहर में डूबने से मौत हो जाती है।
पाबंदी का बोर्ड लगाकर कर ली इतिश्री : पश्चिमी यमुना नहर पर एक-दो जगहों पर प्रशासन ने बीती वर्ष बोर्ड लगाए थे, जिस पर लिखा है कि यहां कपड़े धोना और नहाना सख्त मना है। जबकि इसकी पालना करवाने के लिए मौके पर कोई कर्मी तैनात नहीं किया गया।
नहीं कोई सरकारी गोताखोर, तो कैसे बचे जान
गर्मी के मौसम में यमुना नदी के साथ पश्चिमी यमुना नहर एक माह में औसतन डूबने की दो घटना हो जाती हैं। इस ग्राफ के निरंतर बढ़ने डूबने से मरने वालों की संख्या में भी लगातार इजाफा हो रहा है। हर बार प्रशासन की ओर से किसी के डूबने पर दमकल विभाग द्वारा निजी गोताखारों की मदद ली जाती है। जिन्हें घटनास्थल पर बुलाने में भी बहुत समय जाया हो जाता है और डूबे व्यक्ति की बचने की संभावना कम हो जाती है।
एक माह में होती हैं 20 से 25 घटनाएं :
पश्चिमी यमुना नगर में किसी के डूबने पर प्रशासन की ओर से गोताखोर सुखराम और उसके साथियों की मदद ली जाती है। सुखराम के मुताबिक गर्मी के मौसम में एक माह में नगर में डूबने की करीब 20 घटनाएं हो जाती हैं। उसने पश्चिमी यमुना नहर से अब तक सैकड़ों डूबने वालों को सुरक्षित या उनके शवों को बाहर निकाला है। जिसकी एवज में दमकल विभाग या पुलिस द्वारा कुछ रकम चुका दी जाती है।
अभिभावकों को भी होना होगा जागरूक : उत्थान सेवा संस्थान की संचालिका डॉ. अंजू वाजपेयी का कहना है कि नहर में डूबने वालों में अधिकतर युवा या किशोर होते हैं। इसलिए अभिभावकों को भी थोड़ा जागरूक रहते हुए बच्चों को नहर में नहाने के खतरे के प्रति आगाह करना चाहिए। साथ ही उन्हें इस बात का ख्याल रखना होगा कि उनके बच्चे कहां और क्या कर रहे हैं, तभी इस तरह की घटनाओं पर अंकुश लगाया जा सकता है।
वर्जन
प्रदेश उद्योग व्यापार मंडल के अध्यक्ष महेंद्र कुमार मित्तल ने कहा कि उनकी ओर से यमुना मईया बचाओ नाम से आंदोलन शुरू किया गया है। इसके तहत यमुना को स्वच्छ रखने के साथ घाटों पर स्नान करने की आस्था को कायम रखने के लिए पश्चिमी यमुना नहर से लगते घाटों की सफाई के साथ सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम करने की भी मांग की जाएगी।
गमगीन माहौल में हुआ तीनों शवों का पोस्टमार्टम
थाना जठलाना के अंतर्गत गुमथला घाट पर रविवार को गंगा दशहरे के अवसर पर नहाने आए यूपी के गंगौह निवासी रजत (19) व सोमदीप (20) भी मेले में स्नान करने के लिए पहुंचे थे। इस दौरान जब वे दोनों गुमथला घाट पर यमुना नदी में उतरे और थोड़ी देर बाद पानी के तेज बहाव में वह बहकर यमुना के गहरे कुंड में डूब गए। इसके कुछ देर बाद कुरुक्षेत्र के बाबैन स्थित खैरी निवासी प्रिंस (18) उर्फ सन्नी भी गुमथला घाट पर स्नान करते हुए पानी के बहाव में बह गया। तीनों युवकों के शव रविवार शाम को ही पुलिस ने घाट के गहरे कुंड से बरामद कर पोस्टमार्टम के लिए यमुनानगर के सिविल अस्पताल भेज दिया था। थाना प्रभारी ओमप्रकाश शर्मा ने बताया कि सोमवार को परिजनों के बयान पर 174 की कार्रवाई कर डॉक्टरों के पैनल के जरिए तीनों शवों का पोस्टमार्टम कराकर उन्हें परिजनों को सौंप दिया गया है।