यमुनानगर। अपने हक के लिए जेन-जी अब सड़क पर उतरने से भी पीछे नहीं हट रही है। बसों की कमी से परेशान कॉलेज विद्यार्थियों ने चार दिन में दो बार सड़क पर उतरकर अपनी मांग मनवाई। मंगलवार को छछरौली के लेदी और शुक्रवार को गुलाब नगर-सरांवा रोड पर पाबनी अड्डे के पास विद्यार्थियों ने बसों की कमी को लेकर जाम लगाया। दोनों ही जगह जाम लगते ही प्रशासन और रोडवेज के अधिकारी मौके पर पहुंचे और अतिरिक्त बसें चलाने की व्यवस्था की। विद्यार्थियों ने इसे अपनी जीत के तौर पर लिया है।
दिल्ली के जंतर-मंतर और झारखंड के रांची में जेन-जी के आंदोलनों के बाद युवा पीढ़ी में अपने अधिकारों को लेकर आवाज उठाने का उत्साह बढ़ा है। यमुनानगर में भी इसका असर दिखाई दे रहा है। खास बात यह रही कि पाबनी में लगाए गए जाम में छात्राओं की संख्या अधिक थी। छात्र एक तरफ खड़े रहे, जबकि छात्राओं ने मानव शृंखला बनाकर सड़क के बीचोंबीच खड़े होकर बसों की व्यवस्था सुधारने की मांग की।
बस और स्टाफ की कमी, सड़क पर उतरते ही बढ़ गई व्यवस्था
विद्यार्थियों का कहना है कि लंबे समय से बसों की कमी की समस्या झेल रहे हैं। कई रूट पर बसें कम हैं और जो बसें चल रही हैं, उनका समय भी नियमित नहीं है। इससे कॉलेज पहुंचने में देरी होती है और छात्र-छात्राओं की पढ़ाई प्रभावित होती है। विद्यार्थियों का आरोप है कि जब वे अधिकारियों से समस्या बताते हैं तो बस और स्टाफ की कमी का हवाला दिया जाता है। लेकिन जैसे ही विद्यार्थी सड़क पर उतरकर जाम लगाते हैं तो अतिरिक्त बसों की व्यवस्था हो जाती है। इससे युवाओं के बीच यह धारणा बन रही है कि प्रशासन उनकी बात आंदोलन के बाद ही गंभीरता से सुनता है।
हम पढ़ाई करने के लिए रोज बसों पर निर्भर हैं। बस नहीं मिलने से कई बार कॉलेज पहुंचने में देरी होती है। जब जाम लगाते हैं तो अधिकारी हमारी बात सुनते हैं। इससे युवाओं में अपने अधिकारों को लेकर आत्मविश्वास बढ़ा है। अब हम चाहते हैं कि समस्या का स्थायी समाधान हो और इसके लिए हमें बार-बार सड़क पर न उतरना पड़े।
- निखिल, छात्र।
अगर रूट पर पर्याप्त बसें पहले से चलें तो विद्यार्थियों को आंदोलन करने की जरूरत ही नहीं पड़े। अधिकारियों ने जाम के बाद अतिरिक्त बसें चलाकर यह साबित किया कि व्यवस्था की जा सकती है। युवाओं को अब पता चल गया है कि अपनी समस्या के लिए संगठित होकर आवाज उठानी होगी। हम चाहते हैं कि प्रशासन विद्यार्थियों की परेशानी को आंदोलन से पहले ही गंभीरता से समझे।
- मोहनदीप, छात्र।
बसों की कमी की समस्या लंबे समय से है। अधिकारियों को कई बार बताया, लेकिन समाधान नहीं होता। अब सभी को लगता है कि शांतिपूर्वक शिकायत करने के बजाय आंदोलन करना ही अधिकारियों का ध्यान खींचता है। हमारा उद्देश्य किसी को परेशान करना नहीं, बल्कि समय पर कॉलेज पहुंचने के लिए नियमित और पर्याप्त बस सुविधा हासिल करना है।
- उपेंद्र कुमार, छात्र।
बसों की कमी के कारण रोजाना कॉलेज आने-जाने में परेशानी होती है। कई बार बस नहीं मिलने से कक्षाएं छूट जाती हैं। अधिकारियों को समस्या बताने के बाद भी जब समाधान नहीं हुआ तो विद्यार्थियों को सड़क पर उतरना पड़ा। जाम के बाद अतिरिक्त बसें चलना बताता है कि छात्रों की मांग जायज थी। अब प्रशासन को स्थायी व्यवस्था करनी चाहिए, ताकि विद्यार्थियों को आंदोलन का सहारा न लेना पड़े।
- सौरभ कुमार, छात्र।