जगाधरी। गणेश चतुर्थी को लेकर जिले में खूब धूम हैं। विघ्नहर्ता, रिद्धि सिद्धि के दाता प्रथम पूज्यनीय भगवान गणेश को घर में आमंत्रित करने के लिए लोग उत्सुक हैं। इस बार गणेश चतुर्थी महोत्सव 31 अगस्त से 9 सितंबर तक मनाया जाएगा। इसके लिए गणेश चतुर्थी के दिन भगवान गणेश की प्रतिमा घर, मंदिरों, पूजन स्थलों सहित सामूहिक पंडालों में स्थापित की जाती है। इस बार गणेश चतुर्थी बुधवार को ही पड़ रही है।
बुधवार भगवान गणेश का दिन है, ऐसे में इससे श्रद्धालु बेहद उत्साहित हैं। सनातन परंपरा के अनुसार भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि को भगवान गणेश का जन्म हुआ था। इसी तिथि से गणपति बप्पा की पूजा से जुड़ा 10 दिन का उत्सव मनाया जाता है। प्रथम पूजनीय भगवान गणेश की पूजा से भक्तों की सभी परेशानियां क्षण भर में दूर हो जाती हैं।
उदया तिथि में होगी मूर्ति स्थापना
बूड़िया निवासी पंडित ललित शर्मा ने बताया कि पंचांग के अनुसार गणपति कृपा बरसाने वाली भाद्रपद मास की पावन चतुर्थी मंगलवार दोपहर 3 बजकर 33 मिनट से प्रारंभ होगी। यह तिथि बुधवार दोपहर 3:22 बजे तक रहेगी। ऐसे में उदया तिथि के अनुसार गणेश चतुर्थी का पावन व्रत व पूजन बुधवार को किया जाएगा। उन्होंने बताया कि पौराणिक मान्यता के अनुसार भगवान गणपति का जन्म मध्याह्न यानी दोपहर को हुआ था। इसलिए गणेश चतुर्थी के दिन इसी समय पूजा करना अत्यंत ही शुभ और फलदायी माना जाता है। पंचांग के अनुसार गणपति की पूजा के लिए सबसे उत्तम समय बुधवार सुबह 11:05 से दोपहर 01:38 बजे के बीच है। इस समय में पूजा सर्व मनोरथ पूर्ण करेगी।
ऐसे करें पूजा
गणेश चतुर्थी के दिन प्रात: स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें और गणपति व्रत का संकल्प लें। इसके बाद मध्याह्न काल में किसी चौकी पर लाल कपड़ा या आसन बिछाकर गणपति की मूर्ति प्रतिमा स्थापित करें। भगवान गणपति को नमन कर उस स्थान पर आमंत्रित करें। इसके बाद धूप, दीप, दूर्वा, फूल, फल, अक्षत, पान, सुपारी इत्यादि अर्पित करें। भगवान का मनपसंद भोग यानी मोदक अर्पित करें। इसके पश्चात गणपति अथर्वशीर्ष अथवा गणेश चालीसा का पाठ करें। पूजन के बाद गणेश जी की आरती करें। सभी को प्रसाद वितरित करने के बाद स्वयं प्रसाद ग्रहण करें।
न करें चंद्रमा के दर्शन
पंडित ललित शर्मा ने बताया कि इस दिन चंद्र दर्शन न करें। उन्होंने बताया कि पौराणिक मान्यताओं के अनुसार चतुर्थी के दिन चंद्र दर्शन नहीं किया जाता है। ऐसा करने से भविष्य में कलंक अथवा कई तरह के मिथ्या आरोप लगने का खतरा रहता है। इसलिए चतुर्थी के दिन चंद्र दर्शन न करें और न ही परिवार व बच्चों को ऐसा करने दें।