जगाधरी। लॉकडाउन की वजह से जगाधरी स्थिति दोनों गऊशालाओं में चारे का संकट गहरा गया है। समय पर दान राशि न मिलने पर स्थिति बद से बदतर होती जा रही है। फिलहाल आलम यह है कि गऊशालाओं के पास भूसा व हरा चारा खरीदने के लिए फंड्स नहीं है। एक तरफ तो सरकार गायों की हितैषी होने का दावा कर करती है, वहीं दूसरी ओर गऊशाओं में पर्याप्त मात्रा में चारा उपलब्ध नहीं करवा रही है। जगाधरी में मटका चौक व गऊशाला कॉलोनी स्थित गऊशाला में 1050 से ज्यादा गौवंश है। जिसमें से 200 मटका चौक व 850 गऊशाला कालोनी में हैं। इन गायों को प्रतिदिन 35 क्विंटल भूस व 30 क्विंटल हरे चारे की जरूरत होती है। लेकिन, इन दिनों गऊशाला में चारे का संकट गहराया हुआ है। अमुमन यह स्थित जिले में स्थित सभी गऊशालाओं में हैं। छछरौली स्थित गऊशाला में 800, साढौरा स्थित गऊशाला में 500, आदबद्री स्थित गऊशाला में 300 व बनियावाला स्थित गऊशाला में 400 गौवंश हैं। यहां पर भी गौवंशों के लिए चारे का संकट गहराया हुआ है। बॉक्स 51 लाख का भूसा व 30 लाख का चाहिए हरा चारा जगाधरी स्थित गऊशाला में मौजुद गौवंशों को साल में 12 हजार क्विंटल भूसे की जरूरत पड़ती है। जिसकी कीमत करीब 51 लाख है। जबकि हरा चारा 10 हजार क्विंटल चाहिए होता है। जो कि करीब 30 लाख रुपये का आता है। गऊशाला से मिली जानकारी के मुताबिक सर्दी में उन्हें 750 रुपये प्रति क्विंटल के हिसाब से भूसा खरीदना पड़ता है। जबकि गर्मी में 386 रुपये प्रति क्विंटल के हिसाब से भूसा मिल जाता है। बॉक्स साल में 26 लाख का मिल जाता है दान श्री गऊशाला कमेटी जगाधरी के सचिव जोरा सिंह चहल का कहना है कि उन्हें साल में करीब 26 लाख रुपये की राशि दान स्वरूप मिल जाती है। जिसे गौवंशों के चारे पर खर्च किया जाता है। पिछले दिनों सरकार से 13 लाख रुपये की मदद मिली थी। जिसमें से 10 लाख रुपये बिल्डिंग बनाने पर खर्च किए गए व तीन लाख रुपये चारे पर। इसके बाद दो लाख रुपये चारे के लिए मिलें। लेकिन वह पर्याप्त नहीं है। लॉकडाउन के चलते गऊशाला में दान स्वरूप मिलने वाली राशि में भारी गिरावट आई है। जिस कारण गौवंशों के लिए चारे का संकट गहरा गया है।