यमुनानगर। अधिकारियों की रेकी कर उनकी लोकेशन व्हाट्सएप ग्रुपों में शेयर कर बिना ई-रवाना और बिल के खनन सामग्री से भरे वाहनों को निकलवाने के आरोप में पुलिस ने चार आरोपियों को गिरफ्तार किया है। धरे गए आरोपी आधी रात को महाराजा अग्रसेन चौक पर दो कारों में बैठकर व्हाट्सएप ग्रुपों में ट्रांसपोर्टर व ट्रक चालकों को अधिकारियों की जानकारी दे रहे थे। आरोपियों के पास से बरामद मोबाइल में कई व्हाट्सएप ग्रुप मिले, जिसमें अधिकारियों की लोकेशन और जानकारी शेयर की गई थी। पुलिस ने चारों आरोपियों से मोबाइल बरामद कर साइबर सेल की मदद से जांच शुरू कर दी है।
सेक्टर-17 थाना के एएसआई इरशाद अली ने बताया कि वीरवार रात करीब एक बजे वह मटका चौक जगाधरी पर मुख्य सिपाही रणबीर सिंह और एसपीओ अशोक कुमार के साथ ड्यूटी कर रहे थे। तभी उन्हें सूचना मिली थी कि जगाधरी के अग्रसेन चौक पर दो कारों में कुछ संदिग्ध लोग हैं, जो अधिकारियों की रेकी कर रहे हैं और व्हाट्सएप ग्रुप पर उनकी लोकेशन भेज रहे हैं। ऐसा कर वे अवैध खनन से भरे वाहनों को निकलवाने में खनन माफिया की सहायता करते हैं।
सूचना मिलते ही उन्होंने अर्जुन नगर चौकी प्रभारी एएसआई संदीप, एएसआई दलबीर, मुख्य सिपाही रणबीर और एसपीओ अशोक कुमार के साथ अग्रसेन चौक पर दबिश दी। पुलिस टीम ने मौके पर पहुंचकर वहां खड़ी दो कारों में सवार चार लोगों को हिरासत में लिया। दो आरोपी स्विफ्ट डिजायर कार और दो एक्सयूवी-300 कार में बैठे थे। पूछताछ के दौरान आरोपियों की पहचान अनाज मंडी प्रताप नगर निवासी महावीर सिंह, उसके बेटे जितेश, लक्शीबांस गांव निवासी धर्मपाल व उसके बेटे अक्षय के रूप में हुई। आरोपियों के मोबाइलों को कब्जे में लेकर जांच की गई तो व्हाट्सएप पर कई ग्रुप बने मिले, जिसमें अधिकारियों की लोकेशन व अन्य जानकारी दूसरे ग्रुपों में शेयर की हुई थी। इन ग्रुपों में कई ट्रांसपोर्टर, ट्रक चालक व अन्य लोग जुड़े हुए थे। पूछताछ के दौरान आरोपियों ने बताया कि वह खनन सामग्री से भरे ओवरलोड वाहनों को निकलवाने के लिए प्रत्येक वाहन चालक व ट्रांसपोर्टर से प्रतिमाह 1500 से दो हजार रुपये लेते हैं। पुलिस ने चारों आरोपियों व उसने बरामद मोबाइलों को कब्जे में लेकर गहनता से जांच पड़ताल शुरू कर दी। चारों आरोपियों के खिलाफ केस दर्ज कर शुक्रवार को कोर्ट में पेश किया गया, जहां से उन्हें न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया।
हर-हर महादेव, राम राज्य और जय श्री राम ट्रांसपोर्ट के नाम से बनाए हुए थे ग्रुप -
आरोपी महावीर के मोबाइल फोन में छोरा मैं हरियाणा का, हर-हर महादेव, राम राज्य व जय श्री राम ट्रांसपोर्ट के नाम से व्हाट्सएप ग्रुप बनाए हुए थे, जिस पर अधिकारियों की लोकेशन शेयर की जा रही थी। आरोपियों ने बताया कि इन ग्रुपों में कई ट्रांसपोर्ट व ट्रक चालकों को सरकारी अधिकारियों की लोकेशन की सूचना का आदान-प्रदान होता है, ताकि उनके ओवरलोड ट्रकों का व बिना बिल और ई-रवाना के खनन वाहनों का चालान न हो पाए। इसके एवज में हर ग्रुप एडमिन को 1500 से 2000 रुपये प्रति ट्रक प्रति माह मिलता है। हर हर महादेव ग्रुप का एडमिन अनुज गुज्जर है। इसी प्रकार राम राज्य ग्रुप के तीन एडमिन हैं, जिनके नाम नहीं केवल नंबर दिए गए हैं। जय श्री राम ट्रांसपोर्ट ग्रुप के एडमिन राहुल, अरविंद गुज्जर, रजत गुज्जर व सतेंद्र धीमान हैं। इसी तरह चौथे ग्रुप छोरा मैं हरियाणा का ग्रुप के एडमिन आठ सदस्य हैं। इसी तरह जितेश के मोबाइल फोन में हारे का सहारा बाबा श्याम हमारा ग्रुप एक्टिव मिला, जिसके एडमिन अनुज गुज्जर, ईशु गुज्जर व साहिल पंडित हैं।
व्हाट्सएप चैट मिली डिलीट, माय फाइल्स एप पर मिली लोकेशन भेजने की रिकॉर्डिंग
पुलिस के अनुसार, धर्मपाल के फोन में व्हाट्सएप चैट डिलीट की गई मिली। जब पुलिस द्वारा मोबाइल में माय फाइल्स एप को जांचा गया तो उसमें कई अधिकारियों की लोकेशन भेजने की रिकार्डिंग मिलीं। इसी प्रकार आरोपी अक्षय कुमार के फोन से भी व्हाट्सएप ग्रुप डिलीट किए हुए थे। मोबाइल की जांच करने पर पता चला कि आरोपी ने ग्रुप मेंबरों को वॉयस कॉल व मैसेज कर पुलिस अधिकारियों, डीएसपी व खनन विभाग के अधिकारियों की लोकेशन बताई। इसके अलावा भी ग्रुप सदस्यों को काफी अधिक वॉयस मैसेज किए हुए मिले। जिनकी जांच साइबर सेल की मदद से की जाएगी।
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वर्जन
चारों आरोपियों से बरामद मोबाइलों को कब्जे में ले लिया गया है। साइबर सेल की मदद से उनकी जांच की जा रही है। जांच में जो भी आरोपी सामने आएंगे, उनका पता लगाकर पकड़ा जाएगा। चारों आरोपियों को शुक्रवार को अदालत में पेश किया गया, जहां से उन्हें न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है।
- विश्वजीत, एसएचओ, थाना सेक्टर 17