यमुनानगर। इस साल सावन बीत जाने के बाद भी हथिनीकुंड बैराज पर यमुना नदी पानी के लिए तरसती नजर आई। आंकड़ों के अनुसार ऐसा पहली बार है जब अगस्त माह के दौरान यमुना में इतना कम जलस्तर दर्ज किया गया हो, जबकि अमूमन अगस्त का महीना ही यमुना में बाढ़ और उफान का पर्याय माना जाता रहा है।
इस मानसून सीजन में बीते चार अगस्त को हथिनीकुंड बैराज पर अधिकतम जलप्रवाह मात्र 79,630 क्यूसेक दर्ज किया गया, जो इस साल का अब तक का उच्चतम स्तर है। जल संसाधन विशेषज्ञों के लिए यह आंकड़ा काफी चौंकाने वाला है, क्योंकि इस बार पूरे सीजन में यमुना का जलस्तर एक बार भी एक लाख क्यूसेक के आंकड़े को पार नहीं कर पाया।
अक्तूबर 1996 से जून 1999 के बीच निर्मित हथिनीकुंड बैराज से ही यमुना नदी, पश्चिमी यमुना नहर और उत्तर प्रदेश की ओर जाने वाली पूर्वी यमुना नहर में पानी का सुचारू बंटवारा किया जाता है। इस वर्ष गर्मी के दौरान स्थिति बेहद चिंताजनक हो गई थी, जब जून माह में यमुना का जलस्तर घटकर तीन हजार क्यूसेक से भी नीचे चला गया था। हालांकि बरसाती नदियों में थोड़ा-बहुत पानी जरूर दिखा, लेकिन मुख्य यमुना नदी उफान के लिए तरसती ही रह गई।
हथिनीकुंड बैराज के आंकड़ों के अनुसार चार अगस्त 2012 को यमुना में 98,803 क्यूसेक पानी दर्ज हुआ था। 18 अगस्त 2015 को 1,01,360 क्यूसेक, एक अगस्त 2016 को 1,59,219 क्यूसेक और 28 जुलाई 2018 को 6,05,949 क्यूसेक पानी आया था। 18 अगस्त 2019 को जलप्रवाह बढ़कर 8,28,072 क्यूसेक तक पहुंच गया था।
इसके बाद 25 अगस्त 2020 को 54,065 क्यूसेक और 28 जुलाई 2021 को 1,59,757 क्यूसेक पानी दर्ज किया गया। वर्ष 2022 में 26 सितंबर को 2,95,912 क्यूसेक और 11 जुलाई 2023 को 3,59,760 क्यूसेक पानी दर्ज किया गया। 26 सितंबर 2024 को यह आंकड़ा 99,538 क्यूसेक रहा, जबकि एक सितंबर 2025 को यमुना में 3,29,313 क्यूसेक पानी दर्ज किया गया था। संवाद
वर्ष 1947 में सात लाख क्यूसेक पहुंचा था जलप्रवाह
हथिनीकुंड बैराज बनने से पहले डाउन स्ट्रीम में ताजेवाला हेड था। आंकड़ों के अनुसार 25 सितंबर 1947 को यमुना में करीब सात लाख क्यूसेक पानी आया था। 25 सितंबर 1988 को 5,75,522 क्यूसेक, पांच सितंबर 1995 को 5,38,338 क्यूसेक और आठ सितंबर 2010 को 6,07,076 क्यूसेक पानी दर्ज हुआ। इसके बाद 20 सितंबर 2010 को जलप्रवाह बढ़कर 7,44,507 क्यूसेक तक पहुंच गया था।
इस बार हथिनीकुंड बैराज पर यमुना नदी में काफी कम पानी दर्ज किया गया। इसकी वजह पहाड़ों व यमुना नदी के कैचमेंट एरिया में बारिश का कम होना रहा। वहीं गर्मी में पहाड़ों पर जमी बर्फ भी कम पिघली है। - विजय गर्ग, एक्सईएन, सिंचाई विभाग।