अमर उजाला ब्यूरो
यमुनानगर। फोग सीजन में बीकडी (बुड़िया खदरी देवधर) मार्ग का सफर खतरों से खाली नहीं। यहां हर मोड़ पर मौत खड़ी है। लगभग 25 किलोमीटर के मार्ग पर 20 से अधिक तीव्र मोड़ हैं। इनमें कईयों को ग्रामीण खूनी मोड़ बुलाने लगे हैं, जहां हर वर्ष सड़क हादसों में कई काल के गाल में समा जाते हैं। मार्ग पर कई स्थानों पर सफेद पट्टी नहीं है, तो कई स्थानों पर सफेद पट्टी पूरी तरह मिट चुकी है।
इनके अलावा मार्ग पर ढेरों खामियां ऐसी हैं, जो हादसों का कारण बनती हैं।
नेशनल हाईवे-73ए को बुडिय़ा चौक और खिजराबाद से जोड़ते बीकेड़ी मार्ग पर 35 से अधिक गांव के लोग बसे हैं। इस मार्ग से रोजाना हजारों की संख्या में वाहन निकलते हैं। गांवों के हजारों लोग और विद्यार्थी शिक्षा, काम, व्यापार व अन्य कामों के सिलसिले में शहर आते-जाते हैं। बल्लेवाला खनन जोन क्षेत्र में जाने के लिए भी सैकड़ों वाहन इसी मार्ग से आते हैं।
हालांकि मार्ग का नवनिर्माण हुए अभी तीन साल ही पूरे हुए हैं, लेकिन अभी तक मार्ग पर यातायात नियमों के सही मानक अमल में नहीं लाए गए हैं। बुडिय़ा चौक से शुरू हुए मार्ग पर बुडिय़ा पश्चिमी यमुना नहर के पुल तक दोनों ओर की सफेद पट्टी गायब व कई स्थानों से काफी फीकी हो चुकी है। तीव्र मोड़ से पूर्व सूचना बोर्ड तो लगे हैं, किंतु कुछ बोर्ड या तो काफी पहले है या फिर झाडिय़ों की आड़ में छिपे हैं। साथ ही मार्ग पर कहीं कैटआई, रेट्रोरिफ्लेक्टर संकेतक व सूचक बोर्ड नहीं हैं। इन्हीं खामियों के बीच धुंध के चलते कई बार चालक वाहन से नियंत्रण खो देते हैं व खुद दूसरों को अपनी चपेट में ले लेते हैं।
आलम यह है कि इन खामियों के चलते तेज गति से लोगों की जान जा रही है, लेकिन विभाग इन्हें दूर करने की जहमत नहीं उठा रहा है।
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नहरी क्षेत्र धुंध के साथ अधिक होते हादसे
क्षेत्र में पश्चिमी यमुना नहर, सोमनदी, थपाना नदी है। इसके चलते यहां धुंध का प्रभाव अधिक रहता है। नहरी क्षेत्र होने के कारण दिन ढलते ही धुंध आने लगती है। रातभर घनी धुंध अगले दिन 10 से 11 बजे तक छाई रहती है। इसके चलते मार्ग पर यातायात के प्रबंध अधूरे होने से क्षेत्र में अधिक हादसे होते हैं।
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सबसे खतरनाक ये छह प्वाइंट
1. बुडिय़ा पाती वाला मोड़ :
पहला प्वांइट बुडिय़ा गुरु द्वारा से पहले पाती वाला मोड़ है। यहां सड़क किनारे लगभग चार फुट की खाई है। यहां तीव्र मोड़ से काफी पहले पूर्व सूचना बोर्ड लगाया गया है। इसके अलावा सफेद पट्टी भी गायब हो चुकी है। धुंध के चलते यहां हादसे का ज्यादा खतरा है। बता दें कि बीते वर्ष 23 अप्रैल की रात को यहां धुंध के चलते कार की बाइक के साथ टक्कर हो गई थी, इसमें गुलाब नगर निवासी दो चचेरे भाईयों की मौत हो गई थी, जबकि उनका एक साथी गंभीर रूप से घायल हुआ था। इसके अलावा कुछ माह पूर्व भी दो बाइकों की टक्कर में एक युवक की मौत हो गई थी।
2. पश्चिमी यमुना नहर पुल के मोड़
दूसरा प्वाइंट पश्चिमी यमुना नहर पुल के दोनों ओर के मोड़ है। पुराना पुल क्षतिग्रस्त होने के बाद सालभर पहले पश्चिमी यमुना नहर पुल तैयार हुआ।
लेकिन अब तक पुल के दोनों मोड़ों पर विभाग की तरफ से ना तो सफेद पट्टी लगाई गई। ना ही पूर्व सूचना बोर्ड। पुल के दोनों मोडों पर 10 से 15 फुट गहरी खाईयां बनी हुई है। कुछ माह पूर्व यातायात संकेतक व बॉउंड्री वाल न होने के चलते यहां एक ट्रक खाई में गिर गया था। जिसके बाद विभाग द्वारा सड़क पर दोनों ओर रेलिंग लगाई गई। लेकिन अभी तक उसपर रेट्रोरिफ्लेक्टर संकेतक नहीं लगाए गए।
जिसके चलते धूंध में यह दिखाई नहीं देते। यहीं नहीं पुल पर ना ही स्ट्रीट लाइट। ऐसे में यदि धुंध में यहां पर वाहन चालक का जरा सा ध्यान इधर उधर हुआ तो वाहन खाई या नहर में गिरेगा।
3. शहजादपुर पंच पीर मोड़ :
बीकड़ी रोड पर तीसरा खतरनाक प्वाइंट गांव शहजादपुर का पंच पीर मोड़ है।
यहां कई बार हादसे हो चुके है। सबसे बड़ा हादसा बीते वर्ष 13 अगस्त की अलसुबह हुआ था। जब तीव्र मोड़ के कारण इंटरलोक टाइलों से भरी ट्रैक्टर ट्राली सड़क किनारे खेत में पलट गई थी। इसमें ट्रॉली पर सो रहे गांव भूड़कलां निवासी अंकित, प्रवेश व अंकेश की मौत हो गई थी, जबकि प्रदीप कुमार घायल हो गया था। यहां पर भी हादसे का कारण तीव्र मोड़ रहा।
4. फतेहगढ़ मोड़
चौथा प्वाइंट गांव शहजादपुर और फतेहगढ़ गांव के बीच में पेट्रोल पंप के नजदीक बना मोड़ है। हालांकि विभाग की तरफ से यहां पूर्व सूचना बोर्ड लगे हुए है। लेकिन उसके बावजूद यहां हादसे होते है। करीब डेढ़ साल पूर्व यहां पर अज्ञात वाहन की चपेट में आने से बाइक सवार मेहर माजरा निवासी एक व्यक्ति की मौत हो गई थी।
5. देवधर गांव के मोड़
पांचवा प्वाइंट गांव देवधर गांव के तीन मोड़ है। गांव का पहला मोड़ सरकारी स्कूल के नजदीक, दूसरा मोड़ पुलिस चेकिंग बूथ के नजदीक और तीसरा मोड़ चेकिंग बूथ से आगे है। यह तीनों मोड़ तीव्र है और तीनों पर ही हादसे होते रहते है। गांवों के बीचों बीच बने तीनों मोड़ों पर हर वक्त ग्रामीण खतरों के साये में गुजरते है।
6. देवधर और छोटा भूड़ के बीच का मोड़
गांव देवधर से लगभग डेढ़ किलोमीटर गांव भूड़ की तरफ जाते हुए मोड़ आता है। यहां पर दोनों तरफ खनन सामग्री निकालने से खाई बनी हुई है। यहां पर मार्ग पर कुछ ही स्थान पर रोक लगाई हुई है, जबकि लगभग तीन मीटर तक मार्ग पर कोई बाऊंडरी वाल या रेलिंग नहीं लगाई गई। ऐसे में धुंध में जरा सा ध्यान हटते ही वाहन खाई में गिरने का खतरा है।
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ये खामियां दूर हो तो हादसे रुके :
मार्ग पर कई स्थानों पर सिर्फ सेंटर लाइन खींची गई है, जबकि पैज (सड़के के किनारों पर दोनों तरफ) लाइन पूरी तरह मिट गई है या फिर फीकी पड़ गई है। इसके अलावा मार्ग पर कैट आई, ब्लिंकर व स्पीड लिमिट सूचक जैसे ट्रैफिक कंट्रोल डिवाइसिस भी कहीं-कहीं है। कई जगह मार्ग से गहरी खाईंयां लगती हैं। तीव्र मोड़ों पर अनियंत्रित होकर खाई में गिरने के कई हादसे हो चुके हैं। पश्चिमी यमुना नहर पर यातायात नियमों के साथ स्ट्रीट लाइट का अभाव है। तीव्र मोड़ों से पूर्व सूचना बोर्ड कई स्थानों पर लगभग तीन सौ मीटर तक पहले लगाए हुए है। मार्ग पर बनाई गई पुलियों पर कई स्थानों पर कोई संकेतक नहीं हैं।
वर्जन
बीकेड़ी रोड पर जो खामियां है, उनकी जांच कर ठीक करवा दिया जाएगा। जहां तक सफेद पट्टी का सवाल है, मार्ग पर ठीक है। कई स्थानों से सफेद पट्टी धूमिल हुई है। जहां तक पश्चिमी यमुना नहर पुल के दोनों तरफ के मोड़ों की बात है। जल्द ही वहां भी सफेद पट्टी व अन्य कार्य करवा दिए जाएंगे।
- आरके टिंडवाल, एक्सईएन, पीडब्ल्यूडी एवं बीएंडआर यमुनानगर।