फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

तेज बारिश से उफनाईं नदियां, गांवों में बाढ़ के हालात

विज्ञापन
टिब्बी अराइयां गांव में जलगमन हुई फसलें। - फोटो : YAMUNA NAGAR
विज्ञापन
पहाड़ी और मैदानी इलाकों में हो रही तेज बारिश से बरसाती नदियां उफान पर हैं। छछरौली इलाके से निकलने वाली सोम व पथराला और कई सहायक नदियां ओवरफ्लो हो गई हैं और इनका पानी गांवों में घुस रहा है। करीब दो दर्जन गांव प्रभावित हैं और यहां बाढ़ जैसे हालात बनने लगे हैं। इन गांवों की नदियों के किनारे की एक हजार से ज्यादा एकड़ में खड़ी फसल जलमग्न हो गई है। नदियों से घिरे कई गांवों का बाहरी क्षेत्रों से संपर्क कट गया है। वहीं शुक्रवार रात को यमुना का जलस्तर बढ़ने पर अतिरिक्त पानी को पूर्वी यमुना नहर में छोड़ दिया गया। जिससे हरियाणा से सटे सहारनपुर के बेहट क्षेत्र में दो से तीन फीट तक पानी भर गया। वहीं, शाकंभरी देवी मंदिर की खोल में पानी का तेज बहाव होने के कारण श्रद्धालु भी दर्शन करने के लिए मंदिर तक नहीं पहुंच सके। इसके अलावा बेहट-बिहारीगढ़ मार्ग पर यात्री बसों का संचालन कई घंटे तक बंद रहा।
विज्ञापन

इन गांवों में भरा पानी : इस बार हर साल की अपेक्षा बरसात के सीजन मैं नदियों में पानी काफी देरी से आया है। सोम व पथराला नदियों में आए पानी की वजह से दौलतपुर, टिब्बी अराइयां, महमलीवाला, कोट, खानूवाला, हाफिजपुर, हाफिजी, बरौली माजरा, रायपुर अमोली हडोली, तियानो, सलेमपुर दशोरा, दसोरी, याकूबपुर आदि गांवों में पानी पहुंच चुका हैं। यहां की करीब दो दर्जन गांवों की 500 एकड़ धान गन्ने की फसल जलमग्न हो गई है। जिससे धान की फसल बर्बादी के कगार पर है। पानी के तेज बहाव के चलते रास्तों पर भी कटाव हो गया है। जहां से आवागमन भी प्रभावित हो गया है।
सैकड़ों एकड़ फसल में भरा पानी : किसान कर्मवीर, काका, रवीश, ज्ञानचंद, समेेसिंह, रविंदर, गगनदीप का कहना है कि हर साल सैकड़ों एकड़ फसल पथराला व सोन नदी मे आई बाढ़ की भेंट चढ़ जाती है। प्रशासन हर साल करोड़ों के बाढ़ बचाव राहत कार्य करता है पर किए गए राहत कार्यों का असर कहीं भी होता नजर नहीं आता है। जिस जगह पर नदियों में आई बाढ़ का पानी नदियों से बाहर निकलता है। वहां पर तो प्रशासन ने कभी भी बाढ़ बचाव राहत कार्य नहीं किया। प्रशासन खेतों व गांव के बचाव के लिए करोड़ों रुपये लगाकर बाढ़ राहत कार्य करा रहा है। उसके बावजूद भी जितना नुकसान हर साल हो रहा है। अगले साल फसलों का नुकसान उससे ज्यादा ही होता है।
विज्ञापन

यमुना का जलस्तर घटा : शुक्रवार को जहां यमुना का जलस्तर 52 हजार क्यूसेक के आंकड़े को पार कर गया था। वहीं शनिवार को जलस्तर करीब तीस हजार क्यूसेक दर्ज किया गया। सुबह के वक्त सात बजे पानी घटना शुरू हुआ। शाम पांच बजे तक यह 25 हजार क्यूसेक रह गया। हालांकि शुक्रवार के पानी ने यूपी की तरफ काफी नुकसान किया। उधर, शिवालिक पहाड़ियों से निकलने वाली बरसाती नदियां भी दिन भर उफान पर रही। नदियों में दिनभर पानी चलता रहा।
यमुना में हथिनी कुंड बैराज पर पानी की स्थिति
समय (जलस्तर क्यूसेक में)
सुबह 7 बजे 29842
10 बजे 22696
12 बजे 24200
शाम 5 बजे 25070
(नोट- हथनीकुंड बैराज से मिली जानकारी के अनुसार)
सिद्धपीठ में आया पानी : शिवालिक पहाड़ियों में हुई बारिश के बाद सिद्धपीठ शाकंभरी देवी की बरसाती नदी खोल में आए तेज पानी के बहाव से अफरा तफरी का माहौल बन गया। सिद्धपीठ का मार्ग अवरुद्ध हो गया, जिसके चलते श्रद्धालुओं को भूरादेव मंदिर से ही लौटना पड़ा। यमुनानगर और आसपास के क्षेत्र से बड़ी संख्या में श्रद्धालु माता शाकुंभरी के दर्शन करने जाते हैं। काफी श्रद्धालु तो कई घंटे तक इंतजार करते रहे कि पानी आना बंद हो जाए, तो वह माता के दर्शन करने जाएं, लेकिन पानी आना बंद नहीं हुआ।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें