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Yamuna Nagar News: मानसून की दस्तक पर बाढ़ से बचाव के कार्य अभी अधूरे

Sun, 30 Jun 2024 06:06 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
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सुरेश सैनी
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यमुनानगर। मानसून के साथ ही बाढ़ से बचाव के लिए प्रशासन की ओर से आवश्यक इंतजाम किए जा रहे हैं। दूसरी ओर अधूरे कार्याें से जिले में जलभराव और बाढ़ का खतरा बरकरार है। बाढ़ से बचाव कार्य के लिए सिंचाई विभाग की ओर से 30 जून की डेडलाइन तय की गई थी, लेकिन कार्य पूरा नहीं होने के कारण इसे सात जुलाई तक बढ़ा दिया गया है। इस बाढ़ से सुरक्षा संबंधी कार्य कितने कारगर होंगे यह तो समय ही बताएगा।
साल 2023 में आई बाढ़ ने टापू कमालपुर और छछरौली के बेलगढ़ क्षेत्र में जमकर तबाही मचाई थी। उस दौरान जहां टापू कमालपुर में वन विभाग के हजारों सांगवान के पेड़ों के साथ करीब 200 एकड़ भूमि यमुना नदी में समा गई थी, वहीं बेलगढ़ में भी लगभग 100 एकड़ भूमि प्रभावित हुई थी। इसका मुख्य कारण कारण जिले के साथ लगती शिवालिक की पहाड़ियों में भारी बारिश होना था। इस कारण हथिनी कुंड बैराज से साढ़े तीन लाख क्यूसेक पानी छोड़ा गया था, जो क्षेत्र में तबाही लेकर आया था। इससे सबक लेते हुए इस बार सिंचाई विभाग ने बाढ़ बचाव कार्य के लिए 100 करोड़ रुपये का बजट तैयार किया था, किंतु 61 कार्यों के लिए 72 करोड़ रुपये मंजूर हुए। इसमें तीन कार्य पंचकूला क्षेत्र के हैं। ऐसे में जिले में अब अलग-अलग जगहों पर 65 करोड़ रुपये से 58 स्थानों पर कार्य चल रहे हैं। विभाग के दावे अनुसार, 20 कार्य पूरे हो चुके हैं और 25 कार्यों का काम दो से तीन में पूरा हो जाएगा तथा अन्य कार्य भी डेडलाइन सात जुलाई तक पूरे कर लिए जाएंगे।
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...60 घरों ने किया था पलायन
टापू कमालपुर गांव और यमुना नदी के बीच में 150 मीटर का फासला है। नदी की तरफ गांव के जयपाल सिंह का अंतिम मकान है। गांव और नदी का फासला पिछले साल यमुना नदी में आए अधिक पानी से हुए भूमि कटाव के कारण कम हुआ है। जबकि इससे पहले नदी और गांव में 300 एकड़ से अधिक का फासला था। साल 2023 में सांगवान के पेड़ाें के साथ 200 एकड़ भूमि यमुना में समा गई। भूमि कटाव न हो, इसके लिए सिंचाई विभाग की तरफ से इस बार 9.71 करोड़ रुपये से 15 स्टड डाले गए और 2800 फीट यानी एक किमी. तक पत्थरों से पटरी बनाई गई है। पिछले साल भूमि कटाव होने से गांव में बाढ़ के डर के कारण यहां के करीब 60 परिवारों ने पलायन कर रिश्तेदारों के यहां शरण ली थी। टापू कमालपुर के ग्रामीण विकास राणा, सुभाष राणा ने बताया कि भूमि कटाव को रोकने के लिए सिंचाई विभाग की तरफ से बेहतर कार्य किया गया है, लेकिन पिछले साल आए पानी को ग्रामीण भूले नहीं है। उस दौरान यमुना नदी के पानी से हुए भूमि कटाव को लेकर ग्रामीण चार दिन तक सोए भी नहीं थे।
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यहां अभी तक पत्थर पूरा नहीं हो पाया
पिरथीपुर, सिंहपुरा, नगली, मद्दीपुर ऐसी साइट है, जहां पर अभी तक पत्थर ही पूरा नहीं हो पाया है। ऐसे में इन जगहों पर समय रहते काम पूरा नहीं किया जा सकता। इस कारण बारिश के दिनों में नदियाें के आसपास की बस्ती में बाढ़ का खतरा अधिक होगा।
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वर्जन

पहले बाढ़ बचाव कार्य की डेडलाइन 30 जून थी, लेकिन कई जगहों पर चल रहे स्टड कार्य में पत्थर की कमी पड़ गई। ऐसे में कार्य खत्म करने की डेडलाइन को सात जुलाई तक बढ़ा दिया गया है। जिले में 65 करोड़ रुपये से 58 कार्यों पर काम चल रहा है, जिसे दो से तीन में पूरा कर लिया जाएगा।
- आरएस मित्तल, एसई, सिंचाई विभाग यमुनानगर।
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