यमुनानगर। शहर की नई सरकार (मेयर व 22 वार्ड पार्षदों) से नगर निगम में शामिल गांवों के लोग सुधार की गुहार लगा रहे हैं। इनका आरोप है कि निगम में शामिल होने के 16 वर्षों के बाद भी कहीं गलियों-सड़कों तो कहीं जल निकासी, सफाई, स्ट्रीट लाइट जैसी दिक्कतें हैं। इन गांवों के लोगों की मांग है कि शहरियों की तरह वह सभी टैक्स दे रहे हैं तो उन्हें भी मूलभूत सुविधाएं मिलें।
उल्लेखनीय है कि नगर निगम यमुनानगर-जगाधरी का गठन मार्च 2009 में किया गया था। इसके लिए यमुनानगर और जगाधरी नगर परिषद को लिया गया था। नगर निगम के गठन को चार लाख की आबादी होनी चाहिए थी, पर दोनों परिषद की आबादी करीब तीन लाख थी। इस कारण नगर निगम में कुल 33 पंचायतों को शामिल किया गया, इसमें 45 गांव हैं। हालांकि नगर निगम में शामिल होने के बाद इन गांवों के लोगों को सुविधाएं मिलने की उम्मीद थी, पर गांवों के लोगों का आरोप है कि निगम में शामिल होने के बाद से गांवों की सूरत नहीं सुधर पाई। हालत ये हैं कि कई जगह गलियों-सड़कों, जल निकासी, सफाई, स्ट्रीट लाइट जैसी दिक्कतें हैं। अब शहर में नई सरकार (मेयर व 22 वार्ड पार्षदों) बनने पर निवासी गांवों का हाल सुधारे जाने की मांग कर रहे हैं।
सफाई, निकासी, स्ट्रीट लाइट व्यवस्था चरमराई
दड़वा के देवीलाल, रजत, दलीप, अमित पुनिया, कुलवंत, रामकुमार, शादीपुर के विनोद, कमल रवि, विपिन, कांसापुर पवन सैनी, प्रताप राणा, रमेश, जड़ौदा के जगमाल, राकेश मंगला और सुरेंद्र सिंगला ने बताया कि गांवों के निगम में शामिल होने पर यहां मूल सुविधाएं मिलने के साथ बड़े विकास कार्य लगने की उम्मीद थी। 16 वर्ष बाद भी गांवों में नगर निगम से जुड़ी सफाई, निकासी, स्ट्रीट लाइट जैसी व्यवस्था चरमराई हुई है। कई सड़कें व गलियां टूटी हैं।
कहीं सीवरेज व नालियां नहीं है या सफाई न होने से जाम है। ऐसे में गंदा पानी गलियों-सड़कों पर बहता है। जलभराव की ज्यादा परेशानी बारिश के दिनों में होती है। कई दिन सफाई कर्मी नहीं आते तो खाली स्थान, प्लॉट व गलियों-सड़कों किनारे कचरे के ढेर रहते हैं। स्ट्रीट लाइट कहीं लगी नहीं तो कहीं बंद हैं। यह परेशानियां एक-दो गांव नहीं, बल्कि निगम में शामिल कई गांवों की है। शहर की नई सरकार का प्राथमिकता पर निगम में शामिल गांवों के हाल सुधारने चाहिए।
वर्जन-
नगर निगम में शामिल गांवों में जरूरी सुविधाएं मुहैया कराई जा रही हैं। साथ ही विकास कार्य भी प्राथमिकता पर कराए जा रहे हैं।जहां कुल काम होना बाकी है, वहां जल्द पूरा कराया जाएगा। - आयुष सिन्हा, आयुक्त, नगर निगम।