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Yamuna Nagar News: पहले सैंपल ठीक नहीं लिए, फिर जांच के लिए गलत लैब भेज दिए

Sat, 20 Jul 2024 06:54 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
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यमुनानगर। कृषि विभाग के उपनिदेशक कार्यालय में शुक्रवार को सीएम फ्लाइंग की टीम ने दबिश दी। इस दौरान कार्यालय का स्टाफ तो मौजूद मिला, लेकिन यूरिया के सैंपल लेने में की गई गड़बड़ी का सीएम फ्लाइंग ने खुलासा किया। जांच के दौरान पता चला कि कृषि विभाग के अधिकारियों ने टेक्निकल ग्रेड यूरिया के जो सैंपल पिछले दिनों लिए थे, वह ठीक से नहीं लिए गए। साथ ही तत्कालीन उपनिदेशक आत्मा राम गोदारा ने (फिलहाल पानीपत में कार्यरत) जानबूझ कर सैंपल को जांच के लिए गलत लैब में भेज दिया। जिसका फायदा यूरिया की तस्करी करने वालों को मिला। टीम द्वारा इसकी रिपोर्ट बनाई जा रही है।
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इंस्पेक्टर दिनेश शर्मा के नेतृत्व में सीएम फ्लाइंग की टीम उपनिदेशक कार्यालय में पहुंची। दिनेश शर्मा ने बताया कि भिवानी का विशाल ग्रेवाल टेक्निकल ग्रेड यूरिया का सप्लायर है। जगाधरी अनाज मंडी में उसका तिरुपति ट्रेडर्स के नाम से गोदाम है। टेक्निकल ग्रेड यूरिया का इस्तेमाल फैक्टरियों में ग्लू बनाने में होता है। 12 जनवरी 2024 को कृषि विभाग की टीम ने तिरुपति ट्रेडर्स से टेक्निकल ग्रेड यूरिया के चार सैंपल लिए थे, जो जांच के लिए सेंट्रल लैब फरीदाबाद में भेजे गए थे, लेकिन सेंट्रल लैब में सैंपल तभी भेजे जाते हैं जब राज्य की अपनी लैब न हो। इसलिए फरीदाबाद से सैंपल वापस भेज दिए गए। फिर 16 फरवरी 2024 को सैंपल करनाल स्थित राज्य की लैब में भेजा गया। करनाल लैब से यह आपत्ति जताई गई कि सैंपल ठीक से नहीं लिए गए और इन्हें वापस भेज दिया गया। तब से यह सैंपल पंचकूला निदेशालय में पड़े हुए हैं।
इंस्पेक्टर दिनेश कुमार के अनुसार, जांच में यह भी खुलासा हुआ कि ग्रेवाल का टेक्निकल ग्रेड यूरिया का काम उपनिदेशक आत्मा राम गोदारा ने ही शुरू करवाया था। आरोप है कि आत्मा राम गोदारा की ग्रेवाल से मिलीभगत थी। गोदारा फैक्ट्री संचालकों पर ग्रेवाल से यूरिया खरीदने का दबाव बनाते थे। इसके लिए फैक्ट्री संचालकों को मोबाइल पर मैसेज भी किए जाते थे। यूरिया न लेने पर फैक्ट्री संचालकों को कार्रवाई का भय दिखाया जाता था। ऐसे में मजबूरी में सभी को ग्रेवाल से ही यूरिया खरीदना पड़ता था। इस बारे में सीएम फ्लाइंग की टीम फैक्ट्री संचालकों से लिखित शिकायत लेने की तैयारी कर रही है। इस मामले की जांच जीएसटी विजिलेंस द्वारा भी की जा रही है। दिनेश शर्मा ने बताया कि अभी तक की गई जांच के दौरान ग्रेवाल की तरफ से कोई भी परचेज बिल नहीं दिखाया गया है। इंस्पेक्टर दिनेश शर्मा ने बताया कि यूरिया के सैंपल ठीक से लेने और सही लैब में भेजने की जिम्मेदारी उपनिदेशक आत्मा राम गोदारा की थी। उन्होंने डीलर को अनुचित लाभ पहुंचाया। टेक्निकल ग्रेड यूरिया के अन्य डीलर होने के बावजूद आत्मा राम गोदारा फैक्ट्री संचालकों पर ग्रेवाल से यूरिया खरीदने का दबाव बनाते थे।
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कृषि योग्य यूरिया की होती है तस्करी
फैक्ट्री संचालक ग्लू बनाने के लिए काफी समय से कृषि में इस्तेमाल होने वाले यूरिया की तस्करी करते आ रहे हैं। दरअसल, टेक्निकल ग्रेड और फसलों में डाली जाने वाले यूरिया की कीमतों में जमीन आसमान का अंतर है। टेक्निकल ग्रेड यूरिया की कीमत करीब 2000 रुपये ज्यादा है। इसलिए कृषि में इस्तेमाल होने वाले यूरिया की तस्करी कर फैक्टरियों में ग्लू बनाया जाता है। अब तो टेक्निकल ग्रेड यूरिया के खाली बैग में कृषि में इस्तेमाल होने वाला यूरिया भी सप्लाई होने लगा है। आरोप है कि विशाल ग्रेवाल टेक्निकल ग्रेड यूरिया की आड़ में कृषि में इस्तेमाल होने वाला यूरिया सप्लाई करता है।
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मैंने अपना काम नियमानुसार किया : आत्मा राम
कृषि एवं कल्याण विभाग के तत्कालीन उप निदेशक आत्मा राम गोदारा का कहना है कि मैंने अपना कार्य नियमानुसार किया है। किसी को भी अनुचित लाभ पहुंचाने का काम नहीं किया। यदि कोई जांच एजेंसी इसकी जांच के लिए मुझे बुलाती है तो उसे पूरा सहयोग करुंगा। विदित हो कि आत्मराम गोदारा फिलहालपानीपत जिले में कार्यरत हैं।
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