संवाद न्यूज एजेंसी
यमुनानगर। इस बार मानसून में आई तेज बारिश व बाढ़ से जिले के 527 गांवों में 3544 किसानों की 14296 एकड़ में खड़ी धान, गन्ना व पशु चारे की फसल खराब हुई थी। तब सरकार ने खराब फसलों की गिरदावरी करवा कर त्योहारों से पहले मुआवजा देने की बात कही थी, लेकिन अभी तक किसानों के हाथ खाली हैं। किसानों को अभी तक मुआवजे का एक रुपये भी नहीं आया है। त्योहारों के साथ-साथ धान खरीद का सीजन भी बीत चुका है, लेकिन अभी तक मुआवजे के नाम केवल आश्वासन ही मिल रहे हैं। कई किसान तो ऐसे भी थे जिनकी फसल पर रेत की मोटी परत चढ़ गई। इसलिए वह फसल को मंडियों में भी नहीं बेच पाए।
किसान मोहन लाल ने बताया कि उसकी सारी फसल बाढ़ के पानी में खराब हो गई थी। इससे उन्हें काफी नुकसान हुआ। परंतु अभी तक भी उन्हें फसल का मुआवजा नहीं मिला है। अधिकारियों के पास जाते हैं तो एक ही जवाब मिलता है कि सरकार को ही मुआवजा देना है। कब तक आएगा इसकी किसी को जानकारी नहीं है।
किसान फकीर चंद ने बताया कि बाढ़ के पानी ने इस बार उन्हें तबाह करके रख दिया था। जिन खेतों में नदी का रेत चढ़ गया था वह फसल खराब होने के कारण उसे मंडी में नहीं बेच सके। इस बार त्योहारों में हाथ बहुत टाइट था। इधर-उधर से रुपये उधार लेकर त्योहर मनाए। अब शादियां भी हैं ऐसे में चिंता सताए जा रही है। सरकार को जल्दी मुआवजा देना चाहिए।
किसान पाला राम ने बताया कि सोम नदी के पानी से हर साल उनकी फसल खराब हो जाती है। परंतु कभी भी समय पर मुआवजा नहीं मिलता। जिस फसल पर नदी का रेत चढ़ गया था वह मंडी में नहीं पहुंच पाई। मुआवजा आ गया होगा इसलिए बैंक के खाते को समय-समय पर चेक करवाते रहते हैं। परंतु अभी तक एक भी रुपया नहीं मिला है।
खंड व्यासपुर के गांव रामपुर कंबोयान के किसान जयकुमार ने बताया कि इस बार मानसून सीजन में सोम नदी में आए उफान से उसकी तीन एकड़ में खड़ी फसल बर्बाद हो गई थी। उसने मुआवजे के लिए पोर्टल पर आवेदन किया था। परंतु अभी तक भी उसे फसल का मुआवजा नहीं मिला है। त्योहार भी खत्म हो चुके हैं। इसलिए अब तो सरकार को मुआवजा दे देना चाहिए।