दस साल की बेटी से छेड़छाड़ के दोषी पिता को कोर्ट ने दो साल की कैद और 10
हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है। यह फैसला अतिरिक्त जिला एवं सत्र
न्यायाधीश रजनीश बंसल की कोर्ट ने सुनाया है।
कोर्ट में करीब एक साल चली
सुनवाई के दौरान छह लोगों की गवाही हुई। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के
बाद कोर्ट ने वीरवार को अपना फैसला सुना दिया। पुलिस से मिली जानकारी के
अनुसार 20 नवंबर 2012 को शहर पुलिस जगाधरी ने एक महिला की शिकायत पर उसके
पति के खिलाफ 10 वर्षीया बेटी के दुराचार तथा छेड़छाड़ करने का केस दर्ज
किया था।
महिला ने अपनी शिकायत में आरोप लगाया था कि उसका पति 4-5 साल से
उसकी बेटी के साथ दुराचार कर रहा है। जब पुलिस ने सरकारी अस्पताल में लड़की
का मेडिकल करवाया, तो उसमें दुराचार की पुष्टि नहीं हुई।
इसके बाद पुलिस
ने मामले से दुराचार की धारा को हटा दिया और भादंसं की धारा 354 और पोक्सो
एक्ट के तहत केस दर्ज कर मामले की जांच शुरू कर दी। पुलिस ने आरोपी को
गिरफ्तार कर कोर्ट में पेश किया। जहां से उसे न्यायिक हिरासत में भेज दिया
गया। कोर्ट में करीब एक साल तक चली सुनवाई के दौरान छह लोगों की गवाही हुई।
दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद वीरवार को कोर्ट में रामकुमार को
दोषी करार देते हुए फैसला सुना दिया। कोर्ट ने बेटी से छेड़छाड़ के दोषी
पिता को दो साल की कैद तथा 10 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है।
हालांकि कोर्ट ने दोषी की एक महीने की सजा सस्पेंड की है।
तांत्रिक के बहकावे में आकर दी थी शिकायत
छेड़छाड़
का केस दर्ज होने के बाद दोषी अध्यापक रामकुमार ने कहा था कि उसकी पत्नी
तांत्रिक के बहकावे में आकर उसके खिलाफ कार्रवाई को अंजाम दे रही है।
अध्यापक का कहना था कि तांत्रिक का उनके घर पर आना जाना है, जब उसने
तांत्रिक को घर पर आने से रोका, तो उसने उसकी पत्नी के साथ मिलकर उसके
खिलाफ साजिश रच दी।
पक्ष में उतरे थे अध्यापक संगठन
रामकुमार
के खिलाफ केस दर्ज होने के बाद कई अध्यापक संगठन उसके पक्ष में उतर आए थे।
बाद में अध्यापक संगठन दो गुट हो गए थे। हालांकि अध्यापक रामकुमार के पक्ष
में आए संगठन के लोगों ने बस स्टैंड जगाधरी तथा तांत्रिक के घर के बाहर भी
प्रदर्शन किया था।
पति-पत्नी दोनों अध्यापक
पुलिस के मुताबिक
जिस महिला ने अपने पति के खिलाफ शिकायत दी थी, वह अध्यापिका है, जबकि उसका
पति भी सरकारी स्कूल में पढ़ाता है। रामकुमार पर केस दर्ज होने के बाद
दोनों अलग-अलग तत्कालीन पुलिस अधीक्षक से मिले थे। जिस पर एसपी ने निष्पक्ष
जांच का आश्वासन दिया था।