भूमि का मालिकाना हक छीनने के विरोध में किसानों की ट्रैक्टर रैली के दौरान लघु सचिवालय के मुख्य गेट के पास स्थिति उस समय तनावपूर्ण हो गई, जब किसानों को वहां तैनात पुलिस बल ने लघु सचिवालय में नहीं घुसने दिया। इससे नाराज किसान गेट पर ही बैठ गए। किसानों ने ट्रैक्टर सड़क के बीच खड़े कर नेशनल हाईवे पर जाम लगा दिया और शासन प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी शुरू कर दी।
किसान भारतीय किसान यूनियन टिकैत गुट के प्रदेशाध्यक्ष रतनमान सिंह के नेतृत्व में यहां पहुंचे। उन्होंने मिलिट्री ग्राउंड से लघु तक ट्रैक्टर रैली निकाली। जैसे ही यह रैली लघु सचिवालय के मुख्य गेट के पास पहुंची तो वहां तैनात पुलिस बल ने किसानों को लघु सचिवालय में नहीं घुसने दिया। इससे आक्रोशित किसान गेट पर ही बैठ गए। उन्होंने ट्रैक्टर सड़क के बीच खड़े कर नेशनल हाईवे पर जाम लगा दिया। अधिकारियों ने किसानों को समझाने का काफी प्रयास किया, लेकिन वे नहीं माने। किसानों को मनाने एसडीएम सुशील कुमार, डीएसपी रजत गुलिया, तहसीलदार सहित अन्य अधिकारी जुटे रहे। काफी देर बाद भी जब किसानों ने गेट खाली नहीं किया तो डीसी को उठकर आना पड़ा। डीसी पार्थ गुप्ता ने उनके बीच पहुंच किसानों की बात सुनी और ज्ञापन लिया।
किसानों के सड़क पर ही बैठ जाने से लघु सचिवालय के सामने से गुजर रहे पुराने सहारनपुर हाईवे पर जाम लग गया। जिससे मार्ग पर वाहनों की लंबी कतारें लग गई। ऐसे में राहगीर व वाहन चालकों को दिक्कतें झेलनी पड़ी। वहीं लोगों को इधर उधर के रास्तों से होकर गुजरना पड़ा। इस दौरान यातायात व्यवस्था सुचारु करने में डेढ़ घंटे से ज्यादा का समय लगा।
यहां भाकियू प्रदेशाध्यक्ष रतनमान सिंह ने कहा कि सरकार किसानों की देह शामलात भूमि छीनना चाहती है। जिसका किसान विरोध कर रहे और जब तक सरकार पीछे नहीं हटती विरोध जारी रहेगा। सरकार किसान व किसानी कुचलना चाहती है, जो भाकियू कभी नहीं होने देगी। इसके लिए वे आरपार की लड़ाई करने को तैयार हैं। इस दौरान पूर्व जिलाध्यक्ष सुभाष गुर्जर, साहब सिंह गुर्जर, संदीप संखेड़ा, सुभाष हरतौल, जयपाल चमरौड़ी, यशपाल राणा, रविंद्र पाल सिंह, विनोद दांगी, उदय सिंह, अशोक डांगी, सुखदेव, दिलबाग आदि मौजूद रहे।
किसानों की ट्रैक्टर रैली पूर्व नियोजित थी। जिसके बारे प्रशासन को पहले से नोटिस देकर जानकारी दी गई थी। जिसके चलते लघु सचिवालय में भारी पुलिस बल तैनात किया गया था। जगाधरी से चलकर किसान ट्रैक्टर पर चढ़कर अनाजमंडी पहुंच रहे थे। मंडी गेट पर पहुंचते ही किसान नारेबाजी करते हुए लघु सचिवालय पर जाने लगे, लेकिन पुलिस ने उन्हें रोक दिया। जिससे किसान नाराज हो गए और वहीं गेट से रोड तक सड़क पर ही बैठ गए। वहीं अनाजमंडी की बजाए ट्रैक्टर सड़क पर खड़े करके जाम यातायात पूरी तरह रोक दिया। यहां किसानों ने सरकार के खिलाफ जमकर की नारेबाजी।
किसानों के जाम लगाते ही प्रशासनिक अधिकारियों के हाथ पांव फूल गए। इस दौरान तहसीलदार ने किसान नेताओं से बात करनी चाही, लेकिन वे डीसी को बुलाने पर अड़ रहे। डीसी पार्थ गुप्ता वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग में थे। ऐसे में एसडीएम सुशील कुमार किसानों से बात करने पहुंचे। एसडीएम ने किसानों से उन्हें ज्ञापन देने को कहा, लेकिन उन्होंने साफ मना कर दिया। किसान डीसी को बुलाने की बात पर अड़े रहे। करीब आधे घंटे बाद डीसी किसानों के बीच पहुंचे। इस दौरान भाकियू नेता और किसान सड़क पर बैठे रहे और डीसी खड़े रहे। करीब 20 मिनट डीसी ने खड़े होकर किसानों की बात सुनी और किसानों ने उन्हें ज्ञापन लिया। किसानों का प्रदर्शन करीब सवा घंटा चला, लेकिन यातायात व्यवस्था सुचारु करने में करीब डेढ़ घंटा और लग गया।