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दिल्ली कूच से पहले किसान कई किसान नेता गिरफ्तार

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भाकियू किसानों की मांगों को लेकर कल लाखों की संख्या में दिल्ली कूच करेंगे। किसानों को दिल्ली जाने से रोकने के लिए सरकार ने भी प्रयास शुरू कर दिए हैं। प्रदेश भर में सरकार के आदेश पर पुलिस ने विभिन्न किसान संगठनों के किसान नेताओं की धरपकड़ शुरू कर दी है। बीते सोमवार और मंगलवार को कई किसान नेताओं को हिरासत में लिया गया है। पुलिस की कार्रवाई देखकर किसान नेताओं और यूनियन के पदाधिकारियों ने अपने मोबाइल फोन बंद कर लिए और खुद भी भूमिगत हो गए है।
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पुलिस ने भारतीय किसान यूनियन के जिला प्रधान सुभाष गुर्जर को उनके गांव धौडंग से हिरासत में लेकर थाने ले आई। वहीं पुलिस ने भाकियू ब्लॉक साढौरा प्रधान सतपाल सिंह, प्रदेश अध्यक्ष रतनमान, भारतीय किसान यूनियन चढूनी ग्रुप के प्रदेश कार्यकारी अध्यक्ष कर्म सिंह मथाना को गिरफ्तार किया है। वहीं गांव टोपरा में जिला युवा अध्यक्ष संदीप टोपरा व प्रदेश सचिव हरपाल सुढ़ल को गिरफ्तार करने के लिए दबिश दी। लेकिन, वह पुलिस के हत्थे नहीं चढ़ पाए।
पुलिस ने आंदोलन के दो दिन पहले ही किसान नेताओं को गिरफ्तार करने के लिए अभियान चलाया है। जिससे किसान दिल्ली कूच न कर सके। इस बारे भारतीय किसान यूनियन के जिला प्रधान संजू गुंदयाना ने बताया कि पुलिस ने तड़के 2 बजे उनके निवास पर उन्हें गिरफ्तार करने के लिए दबिश दी। लेकिन, वह अपने निवास पर नहीं थे। जिस कारण वह गिरफ्तार होने से बच गए। इस दौरान गांव गुंदयाना में जिला प्रधान संजू गुंदयाना को गिरफ्तार करने आए पुलिस कर्मचारियों से ग्रामीणों की नोकझोंक भी हुई।
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किसान नेताओं की पुलिस द्वारा गिरफ्तारी का ग्रामीणों ने विरोध किया। मंगलवार की सुबह 5 बजे थाना रादौर प्रभारी इंस्पेक्टर दीपचंद ने गांव गुंदयाना का दौरा किया। पुलिस ने किसान यूनियन के गढ़ माने जाने वाले गुंदयाना गांव में किसान नेताओं को गिरफ्तार करने की लिए इधर-उधर दबिश दी। लेकिन पुलिस की कार्रवाई को देखते हुए किसान नेता अपने मोबाइल फोन बंद करके भूमिगत हो गए हैं।
किसान नेता संजू गुंदयाना ने बताया कि पुलिस की कार्रवाई से किसान डरने वाले नहीं है। प्रदेश के लाखों किसान दिल्ली कूच को लेकर प्रदेश से रवाना होंगे। सरकार कितना भी जोर लगा लें किसान सरकार के किसी दबाव में आने वाले नहीं है। सरकार भले ही किसानों की आवाज को दबाने का प्रयास करें। लेकिन, किसानों का दिल्ली कूच को लेकर मनोबल गिरने वाला नहीं है।
पुलिस की दबिश के बाद ज्यादातर किसान नेताओं ने अपने मोबाइल बंद कर लिए है और वह भूमिगत हो गए है। वहीं किसानों की अगली रणनीति पर नजर रखने को खुफिया तंत्र भी चौकन्ना हो गया है। उधर, किसान दिल्ली कूच को लेकर अड़े हुए है। वहीं पुलिस व प्रशासन किसानों पर अपनी नजर गड़ाए हुए है।
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