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दहेज हत्या में पूर्व एएसआई और बेटे को आठ-आठ साल की सजा

Tue, 29 Oct 2013 11:59 PM IST
यमुनानगर
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अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायधीश रजनीश बंसल की कोर्ट ने दहेज हत्या के एक मामले में पूर्व एएसआई, उसके बेटे और पत्नी को दोषी करार दिया है।
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कोर्ट ने एएसआई और उसके बेटे को आठ-आठ साल और पत्नी को सात साल कैद की सजा सुनाई है। कोर्ट ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद मंगलवार को फैसला सुनाया।

यह था मामला
तेरह जून 2011 को शहर पुलिस जगाधरी को दी शिकायत में गांव खरक जिला भिवानी निवासी कंवरपाल ने बताया कि आठ फरवरी 2011 को उसकी बेटी निशा की शादी गांव सालवन जिला करनाल निवासी मोहित पुत्र किरण पाल (जगाधरी में तैनात एएसआई) के साथ हुई थी।
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उन्होंने बताया कि शादी के बाद निशा अपने पति मोहित, सास पुष्पा और ससुर किरण पाल के पास जगाधरी पुलिस लाइन में रहने लगी। शादी के कुछ दिनों के बाद ही निशा के पति मोहित, ससुर किरण पाल, सास पुष्पा देवी ने उसे दहेज के लिए तंग करना शुरू कर दिया।

अप्रैल 2011 में जब निशा मायके आई थी तो उसने ससुराल पक्ष द्वारा दहेज मांगने और ताने मारने की बात परिजनों को बताई थी। कवंरपाल का आरोप था कि निशा के ससुर सोने की चेन और पति बड़ी गाड़ी के लिए उसकी बेटी को तंग करता था। है।

 उन्होंने बताया कि 17 मई 2011 को उन्होंने अपनी बेटी निशा को समझा बुझा कर मायके भेजा और साथ में उसे सोने की लोकेट की चेन भी दी। उसके बाद 12 जून 2011 को जब उसकी बेटी निशा ने उसे फोन किया तो वह काफी घबराई हुई थी। 13 जून 2011 को उसके समधी किरण पाल ने उन्हें फोन पर बताया कि निशा घर में सफाई करते समय गिर कर चोटिल हो गई है।

सूचना मिलने के बाद जब वह परिवार के अन्य सदस्यों के साथ जगाधरी के सिविल अस्पताल में पहुंचे तो उसे बेटी की मौत हो चुकी थी। गौरतलब है कि निशा घर में फंदे से लटकी हुई मिली थी।

करीब दो साल तक चली सुनवाई
पुलिस ने कंवर पाल की शिकायत पर मृतका के पति मोहित, एएसआई ससुर किरणपाल और सास पुष्पा देवी के खिलाफ दहेज हत्या की धारा 304 बी के तहत केस दर्ज किया था। पुलिस ने जांच के दौरान इस केस में भादंसं की धारा 302 और 201 को भी जोड़ा।

पुलिस ने 17 जून 2011 को आरोपियों को गिरफ्तार किया और 18 जून को उन्हें कोर्ट में पेश किया गया, जहां से उन्हें न्यायिक हिरासत में भेजा गया। 18 जुलाई 2011 से इस मामले की सुनवाई कोर्ट में शुरू हुई। करीब सवा दो साल तक कोर्ट में मामले की सुनवाई चली।
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दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद फास्ट ट्रैक कोर्ट के न्यायधीश रजनीश बंसल ने आरोपियों को दोषी करार देते हुए अपना फैसला सुनाया।

पुलिस लाइन में रहता था परिवार
पुलिस से मिली जानकारी के अनुसार एएसआई किरण पाल का परिवार पुलिस लाइन में रहता था। इस दौरान निशा घर में फंदे से लटकी हुई मिली थी।

ससुराल पक्ष के लोगों ने उसे गंभीर हालत में शहर के निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां पर उसे मृत घोषित कर दिया गया था। सूचना मिलने के बाद उस समय शहर थाने में तैनात एएसआई बलराज ने निजी अस्पताल का दौरा किया।

जिसके उपरांत सरकारी अस्पताल में पहुंच कर शव को कब्जे में लेकर जांच शुरू कर दी थी।
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