संवाद न्यूज एजेंसी
जगाधरी। हनुमान गेट स्थित दिव्य ज्योति जागृति संस्थान आश्रम में रविवार को साप्ताहिक सत्संग हुआ। सत्संग में हरियाली तीज का आध्यात्मिक महत्व बताया और तीज महोत्सव मनाया गया। आशुतोष महाराज की शिष्या साध्वी बब्ली भारती ने बताया कि हरियाली तीज शिव शक्ति के मिलन का पर्व है। भारत में मनाए जाने वाले सभी पर्व मनुष्य को आध्यात्मिक उत्थान का संदेश देते हैं।
उन्होंने कहा कि जब हम वह संदेश अनदेखा कर केवल बाहरी रूप से ही पर्व मनाते हैं, तो उनका सकारात्मक प्रभाव हमारे जीवन पर नहीं होता है। उन्होंने बताया कि आशुतोष महाराज कहते हैं कि बिना आध्यात्मिक जागृति के कोई भी पर्व मनाना केवल किसी शव का शृंगार करने जैसा है। चूंकि आध्यात्म ही प्रत्येक पर्व की आत्मा है।
हरियाली तीज का पर्व श्रावण मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को मनाया जाता है, जो साक्षात शिव शक्ति के एकत्व को दर्शाता है। जन्म मरण के चक्रव्यूह में फंसी हमारी आत्मा जब परमात्मा से एकत्व स्थापित कर लेती है तभी वास्तविक हरियाली तीज का जीवन में तत्व घटित होता है।
उन्होंने बताया कि देवर्षि नारद ने जब माता पार्वती को शिव की आराधना करने के लिए प्रेरित किया, तभी मां पार्वती ने तपस्या से भगवान शिव को पति रूप में प्राप्त किया। शिव शक्ति सदा से ही एक हैं, लेकिन यह कथाएं मनुष्य को उसके जीवन का परम लक्ष्य समझाने के लिए साधुओं द्वारा बताई जाती हैं, ताकि हम इस अनमोल मानव तन को संसार के विषय भोगों में ही व्यर्थ न करें और अपने परम लक्ष्य परमात्मा की प्राप्ति का प्रयास करें।
हरियाली तीज के सुअवसर को हम अति दिव्य व अलौकिक बना सकते हैं, यदि हम एक ब्रह्मनिष्ठ संत की शरण में ब्रह्मज्ञान से शिव शक्ति के अलौकिक मिलन का अनुभव अपनी आत्मा में सहज ही कर लेते हैं। तभी हमारा पर्व मानना सार्थक हो पाएगा। कार्यक्रम में सभी ने विश्व शांति के लिए सामूहिक प्रार्थना व ध्यान साधना की। साध्वियों ने भजनों से श्रद्धालुओं को गुरु व परमात्मा की महिमा के बारे में बताया।