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सत्संग से कौआ भी बन जाता हंस : गुरदीप गिरी

Fri, 07 Nov 2025 01:24 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
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समागम के दौरान मंच पर उपस्थित संत-महात्मा। संवाद
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संवाद न्यूज एजेंसी
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व्यासपुर। गुरु रविदास मंदिर, डेरा बाबा लालदास कपालमोचन में वीरवार को ब्रह्मलीन संत रामदयाल की दसवीं बरसी पर संत समागम का आयोजन किया गया। समागम में विभिन्न प्रदेशों से संतों, महंतों ने प्रवचन कर संगत को निहाल किया। पठानकोट से आए महंत गुरदीप गिरी ने सत्संग से कौआ भी हंस बन जाता है।
उन्होंने कहा कि गुरु चंदन समान है जो बेशकीमती हैं। वहीं शिष्य आक के समान है जो बेकीमत है। अगर आक संतों के चरणों में वास करें तो वह भी चंदन बन जाएगा। कबीर दास ने अपनी बाणी में कहा है कि इंसान के जीवन में अगर हमने श्रीराम की अराधना नहीं की तो जीवन निष्फल है। सत्संग में मन में गांठें लेकर न आए और गुरु कहे अनुसार चले तभी जीवन अवश्य सफल होगा। इसी तरह से चेतन जीव की तीन श्रेणियां हैं जिनमें जानवर, इंसान व देव शामिल हैं।
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उन्होंने बताया कि जानवर केवल जानवर होता है, वह इंसान और देव नहीं बन सकता। देव देवता ही होता है, लेकिन इंसान जानवर व देव दोनों ही बन सकता हैं। इंसान अपने सद्गुणों को त्याग कर जानवर बन जाते हैं। इसलिए संत शिरोमणि गुरु रविदास ने अपनी बाणी में कहा है कि मेरी बाणी से जुड़े तो इंसान से देवता बना दूंगा। उन्होंने संगत से कहा कि संत रामदयाल को सच्ची श्रद्धांजलि हम परिवारों में प्यार व समानता की सुगंध से दे सकते हैं।
रक्तदान शिविर में 40 यूनिट रक्त एकत्रित किया गया। सीएचसी व्यासपुर के डाक्टरों की टीम ने रक्त एकत्रित किया। कार्यक्रम महंत निर्मल दास की देखरेख में हुआ। समागम में पहुंचे अंबाला सांसद वरुण मुलाना ने गुरु रविदास मंदिर में माथा टेका। उन्होंने अपने निजी कोष से मंदिर में हर वर्ष एक लाख रुपये देने की घोषणा की। अमरनाथ ज्ञासड़ा, मा. रमेश मछरौली, महंत निर्मलदास व अन्य संतों ने मुख्यातिथि गुरदीप गिरी को सिरोपा व स्मृति चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया।
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इस मौके पर अटूट लंगर बरताया गया। बाबा जीतराम टोपी वाले ने अपनी और से मंदिर में 51 हजार रुपये दान स्वरूप दिए। इस मौके पर संत मंदीप दास, जैनदास, स्वामी ज्ञाननाथ, संत सोमदास, सतपाल दास, सुंदरा नंद, मेघदास, मेनपाल दास, सेवक दास, राजरानी, बलबीर, बालकराम, दीपचंद, राजेश सहित बड़ी संख्या में संगत उपस्थित रहीं।

समागम के दौरान मंच पर उपस्थित संत-महात्मा। संवाद

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