जैतपुर गोहराबणी के साथ लगती बोली नदी ने उत्पात मचाते हुए वन विभाग के 20 एकड़ व किसानों की 50 एकड़ से भी ज्यादा जमीन को कटाव कर बर्बाद कर दिया है। ग्रामीणों का कहना है कि जंगल नदी में समा गया है और अब कटाव गांव के पास पहुंच गया। नदी के बहाव व गांव के घरों में मात्र कुछ फीट का फासला रह गया है। जिसकी वजह से ग्रामीणों में दहशत बनी हुई है।ग्रामीण इरफान सरपंच जैतपुर, फरीद सरपंच नगला मोहिदीनपुर, शाहिद पूर्व सरपंच नगला मोहिदीनपुर, वाजिद, महबूब, तेलू, इकराम, आरिफ, खालिद, इसरार, मौलदीन, रमजान, साजिद, इसबदीन, नाजिम, अली अहमद ने बताया कि अधिक बरसात होने की वजह से गांव के साथ लगती बोली नदी में ज्यादा पानी आने की वजह से जैतपुर, नगला, मोहिदीनपुर, गोहराबणी के साथ-साथ बहुत ज्यादा भूमि कटाव हो गया है। जिसकी वजह से गांव में बाढ़ का पानी घुसने के हालात पैदा हो गए हैं। ग्रामीणों ने बताया कटाव होने का मुख्य कारण नदी में इस बार बाढ़ बचाव राहत कार्य न होना है। ग्रामीणों ने बताया कि प्रशासन व वन विभाग हर वर्ष बरसात से पहले नदी में बाढ़ बचाव राहत कार्य करवाता था जो कि इस वर्ष बिल्कुल भी नहीं हुए हैं। जिसका खामियाजा गांव को भुगतना पड़ रहा है। ग्रामीणों ने बताया कि नदी के साथ विभाग की जमीन लगती है। जिसमें वन विभाग हर साल कटाव रोकने के लिए कार्य करवाता था। जिससे गांव जंगल व किसानों के जमीनें भी सुरक्षित रहती थी। इस बार वन विभाग की तरफ से जंगलों की सुरक्षा को लेकर कोई भी बाढ़ बचाव कार्य नहीं कराया गया है। जिसकी वजह से बोली नदी में आए पानी से वन विभाग का 20 एकड़ जंगल कटाव की भेंट चढ़ गया है। किसानों की भी लगभग 50 एकड़ जमीन नदी में समा चुकी है। उसके बाद नदी का कटाव गांव के पास पहुंच गया है। गांव के घरों और नदी के बहाव में मात्र 10 फीट का फासला ही रह गया है। वन विभाग न तो खुद बाढ़ बचाव के कार्य करवा रहा है और न ही किसी दूसरे विभाग को कार्य करने की अनुमति देता है। जिसका खामियाजा साथ लगते गांवों को भुगतना पड़ रहा है।
इस बारे में जिला वन अधिकारी वीरेंद्र गिल का कहना है कि इस बार जिले में कई जगह कटाव की वजह से जंगलों को नुकसान हुआ है। उच्च अधिकारियों को उनके बारे में लिख दिया गया है। राजपुर गोहराबणी में हुए नुकसान के बारे में भी अधिकारियों को लिखा जाएगा और मौके पर कटाव रोकने के लिए अस्थाई इंतजाम भी कराया जाएगा।