संवाद न्यूज एजेंसी
छछरौली। पथराला नदी का हर साल बढ़ता कटाव छछरौली क्षेत्र के किसानों के लिए बड़ी परेशानी बना हुआ है। पिछले 12-13 वर्षों से अर्जुन माजरी, कोट माजरी और आसपास के गांवों की सैकड़ों एकड़ उपजाऊ कृषि भूमि नदी की भेंट चढ़ चुकी है। हर मानसून में नदी का तेज बहाव किसानों की फसलों को नुकसान पहुंचा रहा है, जबकि ग्रामीणों का आरोप है कि अब तक स्थायी समाधान नहीं किया गया।
किसान ओमप्रकाश, संजीव कुमार, पुनीत वर्मा, बलिंद्र और सोमपाल ने बताया कि धान, गन्ना और पशुओं के चारे की फसल तैयार करने में हजारों रुपये खर्च होते हैं, लेकिन बरसात के दौरान नदी का उफान पूरी मेहनत पर पानी फेर देता है। तेज बहाव खेतों में रेत और मिट्टी की मोटी परत जमा कर देता है, जिससे जमीन दोबारा खेती योग्य बनाने में अतिरिक्त खर्च उठाना पड़ता है।
ग्रामीणों का कहना है कि उन्होंने कई बार सिंचाई विभाग और प्रशासन को ज्ञापन देकर नदी किनारे तटबंध मजबूत करने और कटाव रोकने की मांग की, लेकिन हर बार केवल आश्वासन ही मिला।
किसानों का आरोप है कि न तो सुरक्षा कार्य कराए गए और न ही वर्षों से हुए नुकसान का उचित मुआवजा मिला। ग्रामीणों के अनुसार अब नदी का बहाव धीरे-धीरे कोट माजरी गांव की ओर बढ़ रहा है। यदि समय रहते सुरक्षा उपाय नहीं किए गए तो गांव की आबादी भी कटाव और बाढ़ की चपेट में आ सकती है। वहीं, एसएस मेमोरियल स्कूल के आसपास भी लोगों में दहशत का माहौल है।
ग्रामीणों ने प्रशासन से मानसून के दौरान किसी बड़ी घटना से पहले स्थायी समाधान करने, तटबंध मजबूत कराने और प्रभावित किसानों को मुआवजा देने की मांग की है।
उन्होंने चेतावनी दी कि यदि जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो किसान आंदोलन का रास्ता अपनाने को मजबूर होंगे। वहीं एसडीएम जसपाल सिंह गिल का कहना है कि बारिश के पानी से कहीं भी नुकसान न हो इसके लिए हर संभव प्रयास किए जा रहे हैं।
पथराला नदी में बारिश का पानी आने से खेतों में हुआ भूमि कटाव। किसान