यमुनानगर। राइस मिलरों व एफसीआई तकनीकी सहायक के बीच समझौते होने के बाद एफसीआई के गोदामों में चावल के ट्रकों को एंट्री मिलनी शुरू हो गई है। इससे करनाल जोन के राइस मिलरों ने राहत की सांस ली है। 31 जलाई को चावल जमा कराने की आखिरी तारीख थी। समाचार लिखे जाने तक चावल जमा कराने की तारीख को सरकार ने आगे नहीं बढ़ाया था। राइस मिलरों की मानें तो तारीख आगे बढ़ सकती है। इसके बाद सभी राइस मिलर अपने चावल को एफसीआई के गोदामों में जमा करवा सकेंगे।
वहीं एफसीआई के गोदामों के बाहर चावल की बोरियों के ढेर लगे हुए हैं। इनमें कुछ चावल तो गोदामों के बाहर बने शेड में रखा हुआ है और कुछ खुले में ऐसे ही तिरपाल के नीचे रखा हुआ है। ऐसे में खुले में रखा चावल बारिश के पानी में भीग रहा है। बाल छप्पर गांव में बने गोदाम में चावल की काफी बोरियां बारिश के पानी में भीगी हुई मिली। जो चावल भीग चुका है उसके खराब होने की भी आशंका है।
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1300 से अधिक गाड़ियाें की होनी है एंट्री
जिले में चावल की करीब 1300 गाड़ियों की गोदामों में एंट्री होनी हैं। इनमें से कुछ गाड़ियां गोदामों में कई दिनों से खड़ी हैं तो बाकी का चावल राइस मिलों में रखा हुआ है। एक गाड़ी में चावल की 580 बोरियां आती हैं। एक गाड़ी की कीमत 10.85 लाख रुपये है। गौरतलब है प्रदेश सरकार हर साल राइस मिलरों को मंडियों में खरीदा गया धान देती है। इस धान की कुटाई करके राइस मिलरों को चावल एफसीआई को देना होता है। परंतु करनाल में तकनीकी सहायक के साथ राइस मिलर एसोसिएशन के जिला प्रधान का झगड़ा होने के कारण चावल डिलीवरी रूक गई थी।
डिलीवरी शुरू हो गई है: प्रवीण अग्रवाल
राइस मिलर एसोसिएशन के जिला प्रधान प्रवीण अग्रवाल ने बताया कि मंगलवार शाम को कुरुक्षेत्र में राइस मिलरों की तकनीकी सहायकों व एफसीआई के अधिकारियों से बैठक हुई थी। जिसके बाद आपसी रजामंदी से दोनों पक्षों में समझौता हो गया है। अब गोदामों में चावल की डिलीवरी शुरू हो गई है।