जगाधरी। खेड़ा बाजार में हर रविवार को लगने वाले फड़ी बाजार पर छिड़ा विवाद अभी थमा नहीं है। बाजार में फड़ी न लगे इसके लिए उद्योग व्यापार मंडल हरियाणा लगातार प्रदर्शन व जनसभा कर लोगों का समर्थन जुटा रहा है। इसके लिए वे मंडल प्रतिनिधि डीसी, एसपी, एसडीएम, आरटीओ, नगरनिगम सहित तमाम प्रशासनिक अधिकारियों से मिल चुके हैं। वहीं बाजार में हर सप्ताह फड़ी व रेहड़ी लगाने वाले भी डीसी से मिले पर अभी तक इस मामले का समाधान नहीं निकल पाया है। जबकि करीब 50 साल से लग रहा फड़ी बाजार दो सप्ताह से नहीं लगा है। यह फड़ी बाजार सप्ताह में केवल रविवार को लगाया जाता है।
जानकारी के अनुसार रविवार को जगाधरी के सभी बाजार बंद होते हैं। ऐसे में यहां पर बंद दुकानों के बाहर लोग फड़ी रहेड़ी लगाकर गुजारा करते हैं। यहां पर रेहड़ी फड़ी लगाने वालों की संख्या करीब 1200 है। इसमें कुछ लोग ऐसे हैं जो हर सप्ताह उत्तरप्रदेश के सहारनपुर, उत्तराखंड के हरिद्वार, हिमाचल प्रदेश से यहां फड़ी लगाने आते हैं। यहां फड़ी लगाने वालों में कई किशोर व नवयुवा ऐसे हैं जो स्कूल व कॉलेज में पढ़ते हैं। आर्थिक तंगी के कारण अभिभावक फीस नहीं दे सकते हैं, तो हर सप्ताह यहां फड़ी लगाकर अपनी फीस का इंतजाम करते हैं। कई महिलाएं ऐसी हैं, जिनके पति की मृत्यु हो चुकी है और परिवार की जिम्मेदारी उनके कंधों पर है। इनके पास आमदनी का यही एक जरिया है। वहीं व्यापार मंडल का कहना है कि बाजार में फड़ी लगने से अतिक्रमण होता है और इससे जमा लगता है। जाम में फंसने लोगों को भारी परेशानी होती है। परंतु फड़ी बाजार रविवार को लगता है, रविवार को जगाधरी का बाजार बंद रहता है, ऐसे में अतिक्रमण नहीं हो सकता है। व्यापार मंडल के तथ्यों पर जब पड़ताल की गई तो जमीनी हकीकत कुछ और ही मिली।
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दूसरों को कर रहे जागरूक, खुद बन रहे अनजान
दीये तले अंधेरा की कहावत उद्योग व्यापार मंडल के कुछ पदाधिकारी पर लागू होती है। चूंकि उन्होंने लोगों तो जागरूक करने का बीड़ा उठा लिया, लेकिन दुकानदारों व व्यापारियों को इसमें शामिल नहीं कर पाए। जगाधरी बाजार के हालात ऐसे हैं कि शाम को यहां से गुजरना मुश्किल हो जाता है। फड़ी बाजार केवल रविवार को लगता है, बाकी छह दिन दुकानें खुलती हैं। दोनों तरफ से दुकानदारों का सड़क पर दस दस फीट तक कब्जा है। संचालक दुकान के बाहर टेबल, तख्त व स्टॉल लगाकर सामान बेचते हैं। यहां आने वाले लोग जब सामान लेने दुकान पर जाते हैं तो उन्हें मजबूर सड़क पर वाहन खड़ा करना पड़ता है। जिससे यहां पर जाम की स्थिति बनती है। व्यापार मंडल लोगों से तो अपील कर रहा है, लेकिन व्यापारियों को इसके लिए जागरूक नहीं कर पाया।
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एक स्टॉल पर लगता है उनका सामान
फड़ी लगाने वाले आशीष, गुलशन, रिशु, पीयूष, हन्नी कुमार, पवन कुमार, राम गोपाल, अजय सेठी, दीपक कुमार, विवेक कुमार, अभिषेक कुमार, दीपक ने बताया कि उनकी आजीविका का यही सहारा है। कुछ लोग राजनीतिक लाभ लेने के उद्देश्य से इसका मुद्दा बना रहे हैं। रविवार को फड़ी बाजार लगता है, जिससे लोगों को सुविधा मिल रही है। सभी दुकानदार इसका विरोध नहीं कर रहे हैं, कुछ लोग उनसे ऐसा करवा रहे हैं। उन्होंने बताया कि इससे करीब 1200 परिवारों की आजीविका चल रही है। फड़ी वाले ही सही लेकिन व्यापारी तो वह भी हैं। व्यापार मंडल उनकी सहायता करे।
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वर्जन
बाजार में किसी तरह का अतिक्रमण न हो इसके लिए नगर निगम विशेष रूप से कार्य करता है। नगर निगम आयुक्त के आदेशों पर अतिक्रमण हटाओ अभियान चलाया जाता है। इसके अलावा कहीं अतिक्रमण की शिकायत होती है, तो वहां भी कार्रवाई की जाती है। इसके लिए दुकानदारों को भी जागरूक किया जाता है।
हरजीत सिंह, सीएसआई, जगाधरी।
फड़ी बाजार की वजह से जाम की स्थिति बन रही थी और लोगों को परेशानी हो रही थी। इसलिए फड़ी बाजार बंद कर दिया गया है। लोगों की आजीविका प्रभावित नहीं हो इसके लिए नगर निगम सर्वे कर रहा है। किसी को परेशानी न हो ऐसा प्रावधान किया जाएगा।
आयुष सिन्हा, नगर निगम आयुक्त