संवाद न्यूज एजेंसी
यमुनानगर। अवैध खनन की सामग्री लेकर गुजरने वाले वाहनों को रोकने के लिए नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने गाइडलाइन जारी कर प्रशासन को नाके लगाने के निर्देश दिए हैं। यहां तक नाके किन प्वाइंट पर लगाए जाने है, उसका भी जिक्र किया गया। लेकिन, नाकों से कर्मचारी नदारद होने पर अवैध सामग्री से वाहन अब बेधड़क निकल रहे हैं।
ऐसे में एनजीटी के निर्देशों की धज्जियां उड़ रही। उधर, ये मामला अब एनजीटी के पास पहुंच चुका है, ऐसे में संबंधित विभाग पर बड़ी कार्रवाई हो सकती है। यहां तक गाइडलाइन के अनुसार नाके से कर्मचारी क्यों नदारद है के जवाब भी तलब किया जा सकता है। एनजीटी के निर्देशों के अनुसार प्रशासन की तरफ से जो नाके लगाए गए हैं। उन पर कर्मचारियों को इसीलिए तैनात किया गया है ताकि खनन सामग्री से भरे वाहन बिना बिल, बिना ई रवाना एवं ओवरलोडिंग आदि को चेक करना है। परंतु कर्मचारियों के नदारद होने से अवेध सामग्री से भरे वाहन धड़ल्ले से निकल रहे हैं।
वहीं अवैध खनन सामग्री से भरे डंपरों के काफिले के आगे स्कॉर्पियो गाड़ियों में सवार खनन तस्करों के गुर्गे होते हैं, अगर कोई अधिकारी या कर्मचारी इन्हें रोकने का प्रयास करता है तो यह लोग अपनी दबंगई पर उतर आते हैं। और अवैध खनन सामग्री से भरे ओवरलोड ट्रक सुल्तानपुर एवं मगलावांली गांव से गुजरते हैं। खनन जोन में रहने वाले अंग्रेज सिंह, तरसेम, भूरा, जरनैल कौर, मोहम्मद बशीर आदि ने बताया कि अवैध खनन सामग्री से भरे ओवरलोड डंपरों के कारण सड़क दुर्घटनाओं में भी इजाफा हुआ है। प्रशासन को इनपर अंकुश लगाना चाहिए।
एनजीटी की गाइडलाइन के अनुसार अवैध खनन रोकने के लिए नाके लगाए गए हैं। वहा कर्मचारियों की ड्यूटियां लगाई हैं। कर्मचारियों को पूरी तरह सतर्क रहने के लिए कहा गया है। कोताही बरतने पर कार्रवाई की जाएगी। -डॉ. राजेश, सहायक माइनिंग अभियंता यमुनानगर।