हाथी पुनर्वास केंद्र बणसंतोर में रह रही हथिनियों के लिए सर्दी में दी जाने वाली विशेष डाइट को बंद कर अब मौसम के अनुकूल गन्ना, खीरा और तरबूज को शामिल किया गया है। यही नहीं गर्मी में हथिनियों को कूल-कूल रखने के लिए पक्के कुंड बनवाए गए हैं, ताकि उन्हें मौसम की मार से राहत मिल सके।
केंद्र में रह रही पांचों हथिनियों के लिए प्रतिदिन 90 किलो कद्दू, 40 किलो केला और 250 किलोग्राम गन्ने की प्रतिदिन व्यवस्था की जा रही है। प्रत्येक हाथी पर करीब ढाई से तीन हजार रुपये तक खर्च बताया जा रहा है।
हाथी पुनर्वास केंद्र के मैनेजर आशीष शर्मा ने बताया कि हाथी पुनर्वास केंद्र बणसंतोर में रह रही हथिनियों के लिए सर्दी की डाइट गुड बाजरा बंद कर अब गर्मी में दी जाने वाली गन्ना, तरबूज, खरबूज, केला, खीरा, गोभी शुरू कर दिया गया है। साथ ही केंद्र में हथिनियों के नहाने के लिए पक्के कुंड बनवाए गए हैं, जिसमें गर्मी के मौसम में हाथी अठखेलियां करते नजर आएंगे। हथिनियों को सुबह और शाम के समय जंगल के अंदर ही पगडंडी पर करीब तीन किमी तक सैर भी कराई जा रही है।
केंद्र में पांच हथिनियों की देखभाल के लिए अलग-अलग महावत भी नियुक्त किए गए हैं। प्रत्येक महावत सुबह से शाम तक उनकी डाइट और अन्य देखरेख करता है। केंद्र में 10 शेड बने हैं, जिनमें 20 हाथियों को रखने की क्षमता है। हथिनियों को गर्मी के सीजन में ठंडी चीजें दी जाती हैं, जिसमें तरबूज, खरबूज, केला, खीरा, गोभी हाथियों को काफी पसंद आती है। गर्मी के सीजन में रोजाना हथिनियों को यह सामग्री पर्याप्त मात्रा में दी जाती है।
चंचल सबसे उम्रदराज और लक्ष्मी-2 है छोटी
मैनेजर आशीष शर्मा ने बताया कि हाथी पुनर्वास केंद्र में पांचों हथिनियों में सबसे अधिक उम्रदराज चंचल (85) है। जबकि लक्ष्मी-1 (65), मोती (60), फिर लिली (50) सबसे छोटी लक्ष्मी-2 (40) है। वहीं असमार, अलीशेर, शादाब, आरिफ, खुरशीद इन हथिनियों के महावत हैं। इन सभी मादाओं की देखरेख का जिम्मा वाइल्ड लाइफ एसओएस संस्था करती है।