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कलेसर मेंआधी रात को नेशनल हाईवे पर हाथियों ने मचाया उत्पात

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elephant came frome the forest on the road - फोटो : Yamuna Nagar
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कलेसर नेशनल पार्क में हाथियों के झुंड ने रविवार आधी रात को जगाधरी पावंटा साहिब नेशनल हाईवे पर एक बार फिर से चहलकदमी की। काफी देर तक एक हाथी तो हाईवे के बीचोंबीच में पेड़ों की टहनियां खाता रहा। जिसके चलते हाईवे पर दोनों तरफ वाहनों की लाइन लग गई। हालांकि हाईवे पर चहलकदमी कर रहे हाथियों ने किसी राहगीर या वाहन को कोई नुकसान नहीं पहुंचाया। इसके बावजूद जब तक हाथी हाईवे पर रहे तब तक वाहन चालकों की सांस अटकी रही और उन्होंने अपने वाहनों की हेडलाइट्स चालू रखी। करीब आधा घंटा बाद जब हाथी जंगल की तरफ चले गए, तब राहगीर वाहनों के साथ आगे निकल सके। कलेसर से यमुनानगर लौट रहे राजेश कुमार, सज्जन सिंह, चरणजीत गिल, सुरेंद्र यादव, इमरान खान, आलिम,अहमद आदि ने बताया कि वे रात करीब ढाई बजे अपनी कार से जा रहे थे। जैसे ही जंगल के पास पहुंचे। हाईवे पर हाथी नजर आए। उन्होंने कार रोकी और कुछ दूर वापस घुमाई। कलेसर जंगल से निकले हाथी काफी देर तक नेशनल हाईवे पर ही रहे। जब तक हाथी जंगल की तरफ नहीं चले गए तब तक नेशनल हाईवे पर दोनों तरफ वाहन चालक हाथियों के जाने का इंतजार करते रहे। करीब आधा घंटे के बाद कलेसर जंगल से निकले हाथी वापस जंगल में चले गए। उसके बाद हाईवे का यातायात सुचारु हुआ।
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अभी तक हाथी व अन्य जानवर जंगल में अंदर ही रहते थे और कभी कभार ही हाईवे या आबादी की तरफ आते थे, लेकिन इस बार कई महीने से हाथी व तेंदुए आबादी की तरफ आने लगे हैं। हाथी तो आएं दिन कलेसर और आसपास के गांवों के करीब हाइवे पर टहलते रहते हैं। चार दिन पहले हाथियों ने एक दूधिया की बाइक तोड़ दी थी और पटक पटक कर दूध के ड्रम भी तोड़ दिए थे। इसके अलावा कई बार हाथी खेती को भी नुकसान पहुंचा चुके हैं। हालांकि अभी तक किसी आमजन को कोई नुकसान हाथी नहीं पहुंचा पाएं हैं। फिर भी जंगल के आसपास के गांवों में रहने वाले ग्रामीणों में दहशत हैं और जंगल की तरफ जाने से कतराने लगे हैं।
जिला वन्य प्राणी निरीक्षक सुनील तंवर का कहना है कि नेशनल हाईवे पांवटा साहिब पर हाथियों का आ जाना आम बात है। इससे पहले भी कई बार कलेसर जंगल से निकलकर हाथी हाईवे पर आ चुके हैं। जब तक लोग उनको परेशान नहीं करते हाथी किसी को कुछ नहीं कहते। जंगली जानवरों को उनके जाने का रास्ता दें तो वह किसी को भी नहीं पहुंचाते।
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फोटो नंबर 31
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