दीनबंधु छोटूराम थर्मल पॉवर प्लांट अब सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट से ट्रीट होकर निकलने वाले पानी को इस्तेमाल कर बिजली उत्पादन करेगा। इसके अलावा अन्य कार्यों में ये पानी इस्तेमाल किया जाएगा। अभी तक थर्मल प्लांट में पश्चिमी यमुना नहर से पानी की आपूर्ति हो रही है, लेकिन भविष्य में एसटीपी के पानी के सदुपयोग के लिए यह योजना बनाई गई है। योजना के तहत जनस्वास्थ्य एवं अभियांत्रिकी विभाग की ओर से 8 से 10 पाइप लाइन बिछा दी गई है। अब आगे की प्रक्रिया थर्मल पावर प्लांट द्वारा पूरी की जाएगी। योजना के तहत शुरुआत में 24 एमएलडी पानी सप्लाई किया जाएगा। भविष्य में पानी की मात्रा बढ़ाई जा सकती है।
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प्लांट में है 300-300 मेगावाट की दो इकाइयां
दीनबंधु छोटू राम पावर प्लांट की 300-300 मेगावाट की दो इकाइयां हैं। बिजली उत्पादन में प्लांट की टरबाइनों को चलाने के लिए भाप का उपयोग होता है। भाप बनाने के लिए ईंधन जलाकर पानी को गर्म किया जाता है। यह भाप ही टरबाइनों को गति देने का काम करती है। भाप बनाने के साथ अन्य कार्यों में इस पानी का प्रयोग किया जा सकेगा।
परवालो से औधरी गांव तक बिछाई पाइप लाइन
नगर निगम के परवालो गांव में जन स्वास्थ्य एवं अभियांत्रिकी विभाग ने 24 एमलडी का सीवरेज प्लांट है। जिसमें जगाधरी एरिया से सीवरेज का पानी पहुंचता है। यह पानी ट्रीट होकर समीप से गुजर रही पश्चिमी यमुना नहर में छोड़ा जाता है, लेकिन अब एनजीटी ने सख्ती बरतते हुए इस पानी को नहर में नहीं डालने के आदेश जारी किए हैं। जिस पर सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट के पानी का इस्तेमाल थर्मल में प्रयोग करने योजना बनाई गई है। इसलिए जन स्वास्थ्य विभाग ने औधरी गांव तक पाइप लाइन भी बिछा दी है। इसकी लंबाई करीब 8 से 10 किलोमीटर है। इसके अलावा 10-10 एमलएलडी के दो प्लांट बाडी माजरा गांव में हैं। यहां से भी ट्रीट होकर पानी थर्मल में ही भेजा जाएगा।
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यमुना की धारा होगी स्वच्छ
नदियों को स्वच्छ और प्रदूषण मुक्त रखने के लिए सीवर ट्रीटमेंट प्लांट लगाए गए हैं। यमुनानगर में भी दो सीवर ट्रीटमेंट प्लांट लगे हुए हैं। 45 एमएलडी क्षमता का बड़ा प्लांट कैंप और 20 एमएलडी क्षमता वाला प्लांट तीर्थनगर में लगाया गया है। जबकि तीसरा प्लांट जगाधरी के परवालो गांव में लगा हुआ है। फिलहाल इन प्लाटों से ट्रीट होकर पानी नहरों में गिर रहा है।
वर्जन
-दीनबंधु छोटूराम थर्मल पॉवर प्लांट जनस्वास्थ्य एवं अभियांत्रिकी विभाग से सीवरेज का ट्रीट हुआ पानी लेगा। इसके लिए लाइन बिछा दी गई है। फिलहाल 24 एमएलडी पानी पहुंचाया जाएगा। बाकी कार्य प्लांट की ओर से किया जाना है।
-पारीक गर्ग, एक्सइएन, जनस्वास्थ्य एवं अभियांत्रिकी विभाग
-थर्मल पावर प्लांट में भाप बनाने के साथ अन्य कई कार्यों में पानी का इस्तेमाल होता है। प्लांट में एसटीपी से ट्रीट होकर निकले पानी के इस्तेमाल की योजना है। इसके लिए कार्य किया जा रहा है। जनस्वास्थ्य विभाग ने अपना कार्य कर दिया है।
-राजेश वर्मा, चीफ इंजीनियर, थर्मल पावर प्लांट।