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लंपी वायरस ग्रस्त आठ गाय मरीं, जिम्मेदार बोले- अकेला वायरस नहीं मौत की वजह

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यमुनानगर। शनिवार को लंपी वायरस के 500 और नए मामले सामने आए। पशुपालन विभाग के रिकार्ड के अनुसार जिले में लंपी वायरस की चपेट आए गोवंशीय पशुओं की संख्या बढ़कर ढाई हजार हो गई है। लंपी वायरस की चपेट में आकर आठ गायों की मौत हो चुकी है। अधिकारियों का कहना है कि इन गायों की मौत की वजह अकेला लंपी वायरस नहीं है।
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अभी तक लंपी वायरस ने गायों को ही चपेट में लिया है जबकि अन्य पशुओं में इसके लक्षण नहीं मिले। सबसे अधिक करीब एक हजार केस रादौर क्षेत्र के हैं। इसके अलावा अन्य क्षेत्रों में केस बढ़ने लगे हैं। इससे पशु पालकों की चिंताएं बढ़ गई हैं। इसका कारण यह है कि वायरस ग्रस्त गाय के इलाज का खर्च बढ़ने के साथ गायों के दूध की मांग भी लगातार घटती जा रही है। जिससे पशुपालकों पर दोहरी मार पड़ने लगी है।
गोशालाओं में 3000 गाय, वायरस ग्रस्त तीन हुईं रिकवर
लंपी वायरस का गोशालाओं में अधिक खतरा है, क्योंकि यहां एक साथ सैकड़ों गाय हैं। एसडीओ सतबीर का कहना है कि गोशालाओं में लंपी वायरस फैलने की आशंका से इंकार नहीं किया जा सकता है। इसलिए गोशालाओं में टीमें रेगुलर विजिट कर रही हैं। अभी तक जगाधरी गोशाला से ही वायरस ग्रस्त तीन गाय मिली हैं, जो अब वायरस से रिकवर भी हो चुकी हैं। बता दें कि जिले में साढौरा, छछरौली, जगाधरी, बनियावाला, दामला, काठगढ़ में रजिस्टर्ड छह और जगाधरी में दो अनरजिस्टर्ड गोशालाएं हैं। इनमें करीब तीन हजार गाय हैं।
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डेयरी कॉम्प्लेक्स में भी खतरा, टीमें न पहुंचने का आरोप
दड़वा, कैल, औरंगाबाद, रायपुर गांवों में बने डेयरी कॉम्प्लेक्स में भी करीब 2000 गायें हैं। इसमें अकेले दड़वा कॉम्प्लेक्स में ही 1100 गायें हैं। दड़वा कॉम्प्लेक्स की तीन डेयरियों में पांच गायों में वायरस के लक्षण मिले हैं। डेयरी यूनियन के पदाधिकारियों का आरोप हैं कि डेयरी कॉम्प्लेक्स की गायों को देखने विभाग की टीमें नहीं आईं हैं। दड़वा डेयरी कॉम्प्लेक्स में वायरस फैलने का ज्यादा खतरा है, क्योंकि यहां सड़कों से डेयरियों में एक से दो फीट जलभराव है।
40 फीसदी घटी गाय के दूध की मांग
दड़वा डेयरी कॉम्प्लेक्स के प्रधान जितेंद्र लांबा ने बताया कि गायों में लंपी वायरस फैलने का पता लगने पर लोगों ने गाय का दूध लेना बंद कर दिया है। जो अब गाय के बजाय भैंस का दूध लेने लगे हैं। इससे चारों डेयरी कॉम्प्लेक्स से गायों के दूध की 40 फीसदी मांग घट गई हैं। इससे पशु पालकों पर दोहरी मार पड़ी है, चूंकि गायों के दूध न बिकने के साथ वायरस ग्रस्त गायों का इलाज भी पशुपालक अपने खर्च पर कर रहे हैं। आरोप है कि विभाग से कोई सहयोग नहीं है।
एक मौत की पुष्टि, अन्य मिक्स इंफेक्शन से
पशुपालन विभाग से उपनिदेशक प्रेम सिंह ने कहा कि रादौर में वायरस से एक मौत की पुष्टि हो सकती है, पर अन्य मौत मिक्स इंफेक्शन से मानी गई है, क्योंकि संबंधित गायों को पहले से अन्य बीमारियां की आशंका है। पशु पालकों से अपील है कि वायरस ग्रस्त गायों को अलग रखें व उनका पानी व डाइट भी अलग रखें। वायरस ग्रस्त गायों के संपर्क में आने से पहले व बाद में हाथ धोएं, ताकि स्वस्थ गायों तक वायरस न पहुंचे। वायरस ग्रस्त गायों को नरम डाइट के तौर पर हरा चारा दें व डिटॉल व नीम के पानी से गायों की धुलाई करें। हो सके तो वायरस की रोकथाम के लिए मच्छरदानी प्रयोग करें, क्योंकि मक्खी-मच्छर भी वायरस ग्रस्त गायों से वायरस को स्वस्थ गायों तक पहुंचा सकते हैं।
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