यमुनानगर। सरस्वती नदी को पुनर्जीवित करने का खाका तैयार कर लिया गया है। साथ ही जिस जगह पर आदिबद्री डैम (बांध), सोम सरस्वती बैराज व रिजर्व वायर तथा कनेक्टिंग अंडर पाइपलाइन का कार्य शुरू होना है, इनमें अंडर पाइपलाइन को छोड़ अन्य तीन कंपोनेंट की ड्राइंग डिजाइन बनकर सिंचाई विभाग के पास आ चुकी है। इसे सीडब्ल्यूसी (सेंटर वाटर कमीशन दिल्ली) की ओर से तैयार किया गया है। अब डैम की फॉरेस्ट क्लीयरेंस की मंजूरी भी इसी सप्ताह में मिलने की उम्मीद है। डैम का कार्य हिमाचल की एचपीसीएल (हिमाचल पाॅवर कॉर्पोरेशन लिमिटेड) की ओर से किया जाएगा।
शिवालिक की पहाड़ियों से निकल रही सरस्वती नदी के ऊपर आदिबद्री डैम बनाया जाना है। वहीं डैम से ढाई किमी. नीचे सोम सरस्वती नदी पर गांव काठगढ़ में बैराज बनाया जाएगा। इसका भी ड्राइंग डिजाइन तैयार है, जिसकी फाइनल मंजूरी मिलना बाकी है। इसी तरह खंड बिलासपुर के रामपुर कोंबियान, रामपुर होड़ियान और छलौर तीन गांवों की 325 एकड़ पंचायत भूमि पर परियोजना के तहत रिजर्व वायर बनाया जाएगा। जिसका ड्राइंग डिजाइन भी विभाग के पास आ चुका है। सिंचाई विभाग के मुताबिक, केवल आदिबद्री डैम के लिए फाॅरेस्ट क्लीयरेंस की आवश्यकता है, जबकि सोम सरस्वती बैराज, रिजर्व वायर तथा कनेक्टिंग अंडर पाइपलाइन के लिए पर्यावरण मंजूरी की आवश्यकता नहीं होगी। ऐसे में इन तीनों का कार्य जुलाई माह में शुरू हो जाएगा, इतने में डैम फॉरेस्ट क्लीयरेंस सिंचाई विभाग के पास भी आ जाएगी। ऐसे में डैम बनाने का कार्य भी जुलाई माह में शुरू हो सकता है।
परियोजना के अनुसार, साढ़े सात किमी. तक लंबी कनेक्टिंग अंडर पाइपलाइन बिछाई जानी है। इसके लिए दिल्ली के केंद्रीय मृदा एवं सामग्री अनुसंधान केंद्र (सीएसएमआरएस) द्वारा टेस्टिंग सैंपल लिए जा चुके हैं। जिनकी लैब में जांच हो रही है। यह सैंपल गांव रानीपुर, सुल्तानपुर, काठगढ़, रूल्लाहेड़ी सहित सात गांव से लिए गए हैं, क्योंकि इन्हीं गांवों से पाइपलाइन गुजरेगी। यह पाइपलाइन 2200 एमएम (सवा दो मीटर चौड़ा) होगी। पूरी परियोजना के लिए अभी तक 388 करोड़ रुपये सरकार से मंजूर हो चुके हैं, लेकिन खर्चा बढ़ने पर यह राशि और भी बढ़ सकती है। माना जा रहा है कि आदिबद्री डैम बनने से क्षेत्र में भूजल स्तर में सुधार आएगा। बारिश के दिनों में अत्यधिक वर्षा से पैदा होने वाली बाढ़ की स्थिति से भी निपटा जा सकेगा। साथ ही फसलों की सिंचाई आसान होगी। डैम के साथ-साथ यहां झील बनने से पर्यटक के आकर्षण का केंद्र होगा। इससे हिमाचल और हरियाणा दोनों प्रदेशों को लाभ मिलेगा। संवाद
198 किमी बहेगी सरस्वती नदी
आदिबद्री डैम बनने के बाद सरस्वती नदी का जल हरियाणा में 198 किलोमीटर तक निरंतर प्रवाहित होगा। जल यमुनानगर, कुरुक्षेत्र व कैथल के एरिया से बहकर पंजाब के पटियाला, सतड़ाना के पास घग्गर नदी में मिलेगा। उल्लेखनीय है आदिबद्री डैम को लेकर 21 जनवरी 2022 को हरियाणा-हिमाचल के बीच में समझौता (एमओयू) हुआ था। आदिबद्री बांध हिमाचल की 31.66 हेक्टेयर भूमि पर बनाया जाएगा। इस डैम की चौड़ाई 101.06 मीटर व ऊंचाई 20.5 मीटर होगी और बांध में हर साल 224.58 हेक्टेयर मीटर में पानी का स्टोरेज होगा। 61.88 हेक्टेयर मीटर का पानी हिमाचल व शेष करीब 162 हेक्टेयर मीटर का पानी हरियाणा को मिलेगा। डैम के बनने से आदिबद्री से निकल रही सरस्वती नदी में हमेशा जल प्रवाहित होगा।
सरस्वती हमारी श्रद्धा का केंद्र है, इसके लिए हम दिन रात इस परियोजना में लगे हुए हैं। इसके अलावा सरस्वती नदी में जल निरंतर प्रवाहित होने पर किसानों को फसलों की सिंचाई करने में लाभ मिलेगा। उम्मीद है जुलाई में आदिबद्री डैम बनाने की प्रक्रिया शुरू हो जाएगी। -धुमन सिंह किरमिच, उपाध्यक्ष, हरियाणा सरस्वती धरोहर विकास बोर्ड।
आदिब्रदी डैम, सोम सरस्वती बैराज और रिजर्व वायर की ड्राइंग डिजाइन हमें मिल चुकी है। डिजाइन की फाइल मंजूरी मिलते ही जुलाई में बैराज व रिजर्व वायर का कार्य शुरू हो जाएगा। इतने में आदिबद्री डैम की फॉरेस्ट क्लीयरेंस भी मिल जाएगी। 388 करोड़ रुपये इस परियोजना पर खर्च होने का अनुमान है, निर्माण के दौरान खर्च बढ़ने पर राशि और भी बढ़ सकती है। - नितिन शांडिल्य, प्रोजेक्ट इंचार्ज एक्सईएन, सिंचाई विभाग यमुनानगर।