हरियाणा अध्यापक पात्रता परीक्षा (एचटेट) के प्रमाणपत्र की वैधता सात साल की बजाए आजीवन करने की मांग को लेकर अभ्यर्थी शिक्षामंत्री कंवरपाल गुर्जर से मिले। जगाधरी स्थित शिक्षामंत्री के कार्यालय में एचटेट पास अभ्यर्थियों का प्रतिनिधिमंडल मिला और उन्हें अपनी मांग से अवगत कराया। शिक्षामंत्री ने दोबारा सीएम के समक्ष उनकी मांग रखने का आश्वासन दिया है।
प्रतिनिधिमंडल में शामिल आरती गुप्ता, मयंक, नरेंद्र, सोहन लाल, विवेक सिंह, रामावतार ने कहा कि एचटेट एक योग्यता प्रमाणपत्र है। योग्यता प्राप्त करने के बाद बोर्ड या विश्वविद्यालय से जारी प्रमाणपत्र आजीवन काम आता है। अध्यापक पात्रता परीक्षा पास करने के बाद उसकी वैधता सात साल निर्धारित की गई। वहीं सेंट्रल अध्यापक पात्रता परीक्षा प्रमाणपत्र की अवधि आजीवन है।
प्रदेश में 2014 के बाद कोई भी टीजीटी की भर्ती नहीं हुई है। अब टीजीटी की पोस्ट निकाली गई है, लेकिन अध्यापक पात्रता परीक्षा पास योग्य अभ्यर्थियों के प्रमाणपत्र की अवधि समाप्त हो गई है। इस तरह योग्य अभ्यर्थियों को मौका नहीं मिला और उनका प्रमाणपत्र समाप्त हो गया है। 2014 के बाद दो साल कोरोना संक्रमण में ही बीत गए। इस दौरान भर्ती प्रक्रिया व कोई अन्य परीक्षा नहीं हुई।
अध्यापक पात्रता परीक्षा पास उम्मीदवार सरकार से अनुरोध करते है कि उनका भविष्य संवारने के लिए एचटैट योग्यता प्रमाणपत्र की वैधता आजीवन या कम से कम 10 वर्ष की जाए। इस दौरान राजकीय अध्यापक संघ के जिला प्रधान महेंद्र सिंह कलेर व जिला मुख्य सलाहकार राकेश गुप्ता ने पात्र अध्यापकों की मांग का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि बिना मौका मिले पात्र अध्यापकों के प्रमाणपत्र की वैधता खत्म होना योग्य पात्रों से अन्याय है। पात्रों को मौका दिया जाना चाहिए।
सरकार को उनकी समस्या का समाधान करना चाहिए और इसकी वैधता आजीवन की जानी चाहिए। शिक्षामंत्री कंवरपाल ने कहा कि वे इस बारे में मुख्यमंत्री से बात कर चुके हैं। मुख्यमंत्री ने वैधता बढ़ाने से इंकार कर दिया। वे एक बार दोबारा मुख्यमंत्री से प्रमाणपत्र की वैधता बढ़ाने का आग्रह करेंगे। पात्रों की समस्याओं को मुख्यमंत्री के समक्ष रखेंगे, तो वे निश्चित रूप से समाधान निकालेंगे।