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Yamuna Nagar News: माउंट एवरेस्ट के आधार शिविर तक पहुंचे दुष्यंत

Wed, 07 Jan 2026 12:15 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
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एवरेस्ट के बेस कैंप पर बैठे दुष्यंत जौहर। स्वयं
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संवाद न्यूज एजेंसी
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जगाधरी। खून जमा देने वाली सर्दी में पुलिस लाइन के रहने वाले 27 वर्षीय दुष्यंत जौहर ने एवरेस्ट की 5364 मीटर की चोटी के बेस कैंप तक चढ़ाई की है। अपने केरल के दोस्त अखिल के साथ दुष्यंत ने आठ दिन में माइनस 30 डिग्री सेल्सियस तापमान में 150 किलोमीटर की दुर्गम यात्रा कर इतिहास रचा है। वे एवरेस्ट के बेस कैंप के समिट में भाग लेने वाले यमुनानगर के इकलौते व्यक्ति हैं।
यमुनानगर सीआईए स्पेशल सेल प्रभारी जगदीश जौहर के पुत्र दुष्यंत की इस उपलब्धि से परिवार में जश्न का माहौल है। वहीं, रिश्तेदार व संबंधी परिवार को बधाई देने पहुंच रहे हैं। दुष्यंत की उपलब्धि में विशेष यह है कि उन्होंने सबसे ठंडे मौसम में बिना किसी गाइड के यह गौरांवित कार्य किया है। दुष्यंत ने 12वीं तक यही पढ़ाई की और फिर पंजाब इंजीनियरिंग कॉलेज चंडीगढ़ से मैकेनिकल इंजीनियरिंग की।
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दुष्यंत ने बताया कि पर्वतारोही की यात्रा उन्हें बहुत प्रेरित करती थी। इसके लिए उन्होंने यह करने की ठानी। पिछले साल नेपाल की अन्नापूर्णा के बेस कैंप समिट में गए थे। इसकी कुल ऊंचाई 4100 मीटर और 90 किलोमीटर की यात्रा थी। यह यात्रा करने के बाद उन्होंने एवरेस्ट के बेस कैंप की यात्रा करने का लक्ष्य बनाया था।
माउंड एवरेस्ट का बेस कैंप की ऊचाई 5364 मीटर है, जो 150 किलोमीटर की यात्रा है। इसके लिए उन्होंने साल भर खूब तैयारी की। उन्हें स्वयं को चैलेंज देने और वह पूरा करने में संतुष्टि मिलती है। ऐसे में उन्होंने दिसंबर में इस यात्रा पर जाने की योजना बनाई। उनके साथ केरल का एक दोस्त था। काठमांडू पहुंचने के बाद वे प्लेन से लुकला पहुंचे। इसे एवरेस्ट का प्रवेश द्वार कहा जाता है।
यहां पर हवाई यात्रा भी बेहद रोमांचकारी होती है, चूंकि लुकला हवाई अड्डे पर मात्र 500 मीटर का रनवे है और लैंडिग बहुत जोखिम भरी रहती है। लुकला पहुंचने के बाद उन्होंने अपनी यात्रा शुरू की। 28 दिसंबर सुबह उन्होंने लुकला से चढ़ाई शुरू की। उनके पास एक पर्वतारोही बैग था।
इसमें उनके खाने पीने की वस्तुएं, आपातस्थिति में उपचार वस्तुएं, ऑक्सीजन सिलेंडर, ऊंचाई वाले जूते, थर्मल कपड़े (वाटर प्रूफ), हार्नेस, रस्सी, बर्फ की कुल्हाड़ी, क्रैम्पन, हेलमेट, सनग्लासेस, हेडलैम्प, प्राथमिक चिकित्सा किट इत्यादि लेकर चले थे। वहीं, उन्होंने यात्रा के लिए पर्याप्त पानी और वह जमने से बचाने के लिए केस लेकर चले थे। उनके बैग का वजन करीब 18 किलोग्राम था। उन्होंने बताया कि पूरी यात्रा में उन्हें विभिन्न देशों के मात्र 15 ही लोग मिले थे।
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मंजिल पर पहुंच सब कुछ गए भूल
दुष्यंत ने बताया कि इन दिनों बहुत ही ज्यादा सर्दी होती है। एवरेस्ट की पांच हजार चोटी पर तापमान माइनस (-) 30 डिग्री सेल्सियस से ज्यादा होता है। कभी-कभी यह माइनस 50 से भी नीचे चला जाता था और वहां पर ऑक्सीजन 50 प्रतिशत से भी कम होती है। पहले दिन उन्होंने आठ किलोमीटर की यात्रा की और पहला पड़ाव किया। इसके बाद दस, फिर 12 और फिर 14 किलोमीटर पर पड़ाव लिया। करीब छह दिन बाद वे 4410 मीटर ऊंचाई पर डिंगबोची प्वाइंट पर पहुंचे। यह एवरेस्ट का माध्य केंद्र कहा जाता है। आठवें दिन वे दोपहर करीब तीन बजे बेस कैंप पर पहुंचे। यहां पहुंचने के बाद वे खुशी से फूले नहीं समा रहे थे। भारी बैग के साथ लंबी यात्रा करने के कारण शरीर टूट चुका था और दर्द हो रहा था, लेकिन मंजिल पर पहुंचने के बाद दर्द गायब हो गया। यहां उन्होंने करीब आधा घंटे इसकी खुशी मनाई और फिर वापस निकल पड़े। 28 दिसंबर की रात को वह नीचे लुकला पहुंचे और 29 दिसंबर को काठमांडू आए। दो जनवरी को काठमांडू से हवाई यात्रा से तीन को भारत पहुंचे। दुष्यंत ने बताया कि अगले वर्ष 6000 और फिर एवरेस्ट की सबसे ऊंची चोटी 8848 मीटर फतेह करने का लक्ष्य है।

एवरेस्ट के बेस कैंप पर बैठे दुष्यंत जौहर। स्वयं

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