संवाद न्यूज एजेंसी
यमुनानगर। चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय के अंतर्गत कृषि विज्ञान केंद्र दामला ने धान की सीधी बिजाई की डीएसआर तकनीक को बढ़ावा देने के उद्देश्य से कृषि उपनिदेशक कार्यालय में गांव पालेवाला में किसानों के लिए कृषक प्रशिक्षण शिविर आयोजित किया। कार्यक्रम का उद्देश्य अधिकारियों और किसानों को डीएसआर तकनीक की वैज्ञानिक एवं व्यावहारिक जानकारी देकर इसके व्यापक प्रसार को सुनिश्चित करना था।
समन्वयक डॉ. संदीप रावल ने कहा कि गिरते भूजल स्तर, बढ़ती मजदूरी लागत, श्रमिकों की कमी और जलवायु परिवर्तन जैसी चुनौतियों के बीच डीएसआर तकनीक किसानों के लिए प्रभावी और टिकाऊ विकल्प बनकर उभर रही है। पारंपरिक धान रोपाई पद्धति की तुलना में डीएसआर तकनीक में पानी की कम आवश्यकता होती है, जिससे जल संरक्षण को बढ़ावा मिलता है और भूजल स्तर बनाए रखने में सहायता मिलती है।
डॉ. रावल ने धान की सीधी बिजाई में खरपतवार प्रबंधन के महत्व पर जोर देते हुए किसानों को बिजाई के तुरंत बाद उचित खरपतवारनाशी के प्रयोग तथा 10 से 12 दिन बाद अनुशंसित दवाइयों के छिड़काव की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि डीएसआर तकनीक की सफलता प्रभावी खरपतवार नियंत्रण पर निर्भर करती है।
डॉ. अराधना बाली ने कहा कि डीएसआर तकनीक वैज्ञानिक, व्यावहारिक और लाभकारी खेती पद्धति है। इससे खेती की लागत कम होती है, समय और श्रम की बचत होती है तथा किसानों की आय में वृद्धि होती है। उन्होंने किसानों को खरपतवारनाशकों के सही चयन और आधुनिक डीएसआर मशीनों के उपयोग की जानकारी भी दी। कार्यक्रम में कृषि विकास अधिकारियों और किसानों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। कृषि विज्ञान केंद्र दामला के वैज्ञानिकों ने प्रतिभागियों की जिज्ञासाओं का समाधान किया।