यमुनानगर। मौसम विभाग का पूर्वानुमान है कि 25 जून तक प्रदेश में मानसून दस्तक दे सकता है, यानी इसमें 15 दिन ही बाकी हैं। इसके बावजूद अभी तक शहर के नालों की सफाई का काम शुरू नहीं हो पाया है। ये काम न तो ठेके पर और न ही नगर निगम ने खुद अपने स्तर पर किया है, जिसमें गत वर्षों जैसे देरी हो रही है। इसका खामियाजा मानसून में जलभराव के रूप में भुगतना पड़ सकता है।
ज्ञात हो कि नगर निगम यमुनानगर जगाधरी सदन की बैठकों में कार्यकाल रहते पार्षद कई बार मानसून से पूर्व ही नालों की सफाई की मांग कर चुके हैं। इस पर बाकायदा पूरे साल छह-छह के ठेके देकर नालों की सफाई कराए जाने का प्रस्ताव भी पास कराया था, किंतु इस पर कार्रवाई कागजों में ही है। क्योंकि प्रस्ताव पास होने के बावजूद न तो नगर निगम द्वारा अपने स्तर पर नालों की सफाई की गई और न ही इसका ठेका दिया। हालात ये है कि शहर के ज्यादातर नाले गंदगी से अटे हैं, जिससे मानसून की बारिश में नालों से आसपास जलभराव होने की आशंका है। उधर, मामले में निगमायुक्त आयुष सिन्हा का कहना है कि इस बारे में संबंधित अफसरों को दिशा निर्देश जारी देंगे।
शहर में 92 किमी. के 39 नाले-
नगर निगम यमुनानगर जगाधरी में 92 किलोमीटर लंबाई के 39 नाले हैं। जिनकी सफाई के लिए निगम अफसर दो जोन बांट ठेका देता है। इसमें जोन-1 में जगाधरी के वार्ड-1 से सात के 28.5 किमी. के 12 नाले हैं और जोन-दो में यमुनानगर के वार्ड-8 से 22 के 63.5 किमी. के 27 नाले हैं। दोनों जोन में नालों की ठेके पर सफाई कराने में एक से सवा करोड़ खर्च आने का अनुमान रहता है।
मांग: करोड़ों का ठेका देने के बजाए निगम खुद करे सफाई-
निवर्तमान पार्षदों में वार्ड सात से रामआसरा भारद्वाज, आठ से विनोद मरवाह, 13 से निर्मल चौहान ने कहा कि अब तक नालों की तीन चरणों में सफाई पूरी हो जानी चाहिए थी। लेकिन अब मानसून सिर पर है, तब भी नालों की सफाई शुरू नहीं हो पाई है। अब यह काम ठेके पर देना सरकारी धन की बर्बादी होगा, क्योंकि करोड़ों रुपये में ठेका देने के बावजूद मानसून की बारिश के बीच यह काम होने से खानापूर्ति होगी। इसलिए मांग है कि नालों की सफाई का काम अभी नगर निगम अपने स्तर पर सफाई कर्मचारियों की मदद से शुरू कराए।