संवाद न्यूज एजेंसी
यमुनानगर। मानसून की बारिश में होने वाले जलभराव से निपटने की तैयारी शहर में नहीं दिख रही है। अभी तक नालों की सफाई का काम शुरू नहीं हुआ है। साथ ही नगर निगम के बनाए नालों के निर्माण पर भी सवाल उठ रहे हैं। निवर्तमान पार्षदों का आरोप है कि नाले सड़कों से आधे से एक फीट ऊंचे हैं। कई में साइड की दीवार में होल भी नहीं हैं या वह छोटे व सड़क से कई ईंच ऊपर हैं। ऐसे में करोड़ों खर्च से नाले तैयार करने के बावजूद बारिश का पानी सड़कों पर भरना तय है।
आजादनगर गली नंबर-14 से गोल्डनपुरी तक 30 लाख के खर्च पर जुलाई 2021 में नाला बना। यह नाला सड़क से आधा तो कहीं एक फीट तक ऊंचा है। ऊपर से नाला स्लैब से कवर है और साइड की दीवार से नाले में पानी की निकासी के लिए कई जगह दूर तक कोई होल नहीं है। अहिल्याबाई होल्कर (मधु) चौक से शक्तिनगर मोड तक नगर निगम ने इंटरलॉक टाइल बिछाने सहित नाले बनाने में 3.77 करोड़ रुपये खर्च हुए।
यहां नाला भी सड़क से आधे तो कहीं एक फीट ऊंचा है। सड़क पर लगती नाले की साइड वाली दीवार में बहुत कम जगह 3-6 ईंची होल हैं। ये होल कई जगह सड़क से कई ईंच ऊपर हैं। ऐसे ही बूड़िया गेट रोड, शक्तिनगर में बने नाले सड़क से ऊंचे हैं, वहीं उनकी साइड की दीवार में भी होल नहीं है या बहुत कम व सड़क से ऊंचे हैं।
निवर्तमान पार्षद वार्ड चार से देवेंद्र सिंह, पांच विनय कांबोज, सात से रामआसरा भारद्वाज, आठ से विनोद मरवाह का कहना है कि सड़क पर भरने वाले बारिश के पानी की निकासी इन नालों में कैसे होगी, ये समझना कठिन है। क्योंकि नाले सड़क से ऊंचे होने के साथ उनकी साइड की दीवार से पानी की निकासी हो सके, इसके लिए कहीं होल नहीं है या दूर दूर तक बहुत कम बने हैं।
कई जगह ये होल भी सड़क से ऊंचे हैं। इससे नालों में सड़क का पानी जाने के लिए कुछ ईंच तक जलभराव होना तय है। ऐसा मनमर्जी का काम कर अफसर व ठेकेदार सरकारी धन की बर्बादी कर रहे हैं। इस पर अंकुश के साथ कमी पर कार्रवाई होनी चाहिए। मामले में निगमायुक्त का कहना है कि इस बारे में पता कर संबंधित अफसरों को दिशा-निर्देश जारी करेंगे।