मानूसन करीब है और शहर की सबसे बड़ी जल निकासी परियोजना पर विराम लग गया है। हालांकि इसका काम नगर निगम ने वर्ष-2019 में लगा दिया था। साढ़े तीन साल बाद भी चांदपुर समीप 280 मीटर (70 मीटर रेलवे व 210 मीटर निजी जमीन) हिस्से में ड्रेन नहीं बन पाई। इसमें निजी जमीन पर ड्रेन डालना अफसरों के लिए चुनौती बन गया है, क्योंकि व्यक्ति (निजी जमीन मालिक) ने जमीन देने से इंकार कर दिया है।
नगर निगम की ओर से 280 मीटर हिस्से को छोड़ दोनों ओर करीब 4200 मीटर ड्रेन डालने पर करोड़ों रुपये खर्च किए जा चुके हैं। ऐसे में निगम अफसर निजी जमीन के मालिक को मनाने में लगे हैं, जिसके साथ अगले सप्ताह बातचीत के लिए बैठक भी बुलाई गई है। कुल मिलाकर निजी जमीन के फंसे पेंच में इस मानसून भी यह परियोजना पूरी होती नहीं दिख रही। यानी ड्रेन के बनने से जिन इलाकों में जलभराव से छुटकारा दिलाने के कसीदे पढ़े जा रहे थे, वहां इस बार भी बारिश में लोगों को जलभराव के हालात झेलने पड़ेंगे।
बता दें कि कन्हैया साहिब चौक से जम्मू कॉलोनी के एसटीपी तक स्टॉर्म ड्रेन का काम अमृत (अटल मिशन फॉर रेजुवेनशन एंड अर्बन ट्रांसपोर्टेशन) स्कीम में नगर निगम करवा रहा है। इसका 24 फरवरी 2019 को शिलान्यास हुआ। ड्रेन से जगाधरी से आ रहे बड़े नाले का पानी यमुनानगर की कॉलोनियों के बजाय आउटर में एनएच-73 पर डायवर्ट कर एसटीपी तक ले जाना है। इस 4500 मीटर लंबी ड्रेन का काम 15 अगस्त 2019 में पूरा करने का लक्ष्य था, पर अब तक यह पूरा नहीं हुआ। जगाधरी बस स्टैंड से कन्हैया साहिब चौक तक अन्य ड्रेन तैयार हो गई। पहली ड्रेन के काम में देरी की वजह काम लगने के बाद दूसरे विभागों से एनओसी लेने से लेकर अन्य औपचारिकताएं पूरी करना रही, ऐसा टेंडर व वर्क अलॉट बाद होने पर अफसरों की कार्यप्रणाली पर सवाल भी उठे। बारिश के खलल में भी कई कई माह लटका।
अब चांदपुर आरओबी समीप 280 मीटर हिस्से में ड्रेन का काम अधूरा है। 70 मीटर रेलवे के ट्रैक व जमीन है, जहां से ड्रेन निकालने को नगर निगम ने रेलवे को करीब साढ़े चार करोड़ एस्टीमेट जमा कर रखे हैं, पर अभी तक काम नहीं लगा। इसके पास में ड्रेन के रास्ते 210 मीटर निजी जमीन है, जिसका पेंच सालभर बाद भी निगम अफसर नहीं निकाल पाए हैं। जिन्होंने पहले जमीन को सरकारी बताया फिर निजी निकली तो अधिग्रहित करने का सरकार को केस भेज दिया। जहां अभी तक न जमीन अधिग्रहण की गई न ड्रेन का काम लग पाया।
वार्ड नंबर सात से पार्षद रामआसरा भारद्वाज, आठ से विनोद मरवाह, 13 से निर्मल चौहान ने कहा कि ड्रेन के रास्ते निजी जमीन आ रही है, यह बात ड्रेन के निर्माण के लिए ड्राइंग तैयार करते समय सामने आनी चाहिए थी, पर ऐसा नहीं हुआ। अब ड्रेन पर करोड़ों रुपये खर्च के बाद ही अफसरों को यह जमीन दिखी। यानी उनकी ओर से बड़ी लापरवाही बरती गई, इसलिए जिस तरह ठेकेदार पर काम में देरी करने पर कार्रवाई होती है, उसी तरह परियोजना में देरी के लिए जिम्मेदार अफसरों पर कार्रवाई हो।
रेलवे ने अपने हिस्से में ड्रेन का काम शुरू करना था, पर पास में लगती निजी जमीन के मालिक ने जमीन देने से इंकार कर दिया। इसे अगले सप्ताह बातचीत के लिए बुलाया है। -विकास धीमान, एक्सईएन, नगर निगम।