यमुनानगर। मुकंद लाल जिला नागरिक अस्पताल में विशेषज्ञ डॉक्टरों की इमरजेंसी में ड्यूटी लगाए जाने से मरीजों की परेशानी बढ़ गई है। मरीज दिनभर ओपीडी के बाहर बैठे रहते हैं लेकिन डॉक्टर नहीं मिलते। वहीं डॉक्टर भी दो-दो जगह ड्यूटी कराए जाने से नाराज हैं।
डॉक्टर लगातार दो दिनों से ड्यूटी को लेकर पीएमओ तो कभी सिविल सर्जन से मिल चुके हैं, परंतु अभी तक कोई समाधान नहीं हुआ। कुछ डॉक्टर तो ओपीडी के साथ इमरजेंसी में ड्यूटी करने से साफ इंकार कर चुके हैं। ऐसे में उनसे ड्यूटी करवाने के लिए यहां वहां से सिफारिशें लगवाई जा रही हैं। कुछ भी हो इसका खामियाजा अस्पताल में उपचार के लिए आने वाले मरीज भुगत रहे हैं।
दरअसल जिला नागरिक अस्पताल में डॉक्टरों की बहुत कमी है। अस्पताल में मेडिकल ऑफिसर (एमओ) के कुल 55 पद स्वीकृत हैं। इनमें से 30 पद खाली पड़े हैं। केवल 25 डॉक्टर ही कार्यरत हैं। इनमें से भी नौ गैरहाजिर चल रहे हैं। एमओ में से एमबीबीएस डॉक्टरों की ड्यूटी इमरजेंसी में लगाई जाती है जबकि विशेषज्ञ रोजाना मरीजों की ओपीडी देखते हैं।
अभी तक इमरजेंसी में जिन छह डॉक्टरों की ड्यूटी थी उनमें से दो डेपुटेशन पर अस्पताल में आए हुए थे। जिन सीएचसी व पीएचसी में उनकी ड्यूटी थी वहां डॉक्टर न होने से मरीज परेशान हो गए थे। इसलिए स्वास्थ्य विभाग ने उन्हें वापस भेज दिया। अब डॉक्टरों की कमी के चलते समस्या यह खड़ी हो गई है कि इमरजेंसी में किसकी ड्यूटी लगाई जाए। जो विशेषज्ञ डॉक्टर हैं वह विरोध इसलिए कर रहे हैं कि उन्हें ओपीडी में मरीजों का चेकअप भी करना पड़ रहा है और साथ में इमरजेंसी में भी काम लिया जा रहा है। जिस डॉक्टर की ड्यूटी इमरजेंसी में लग जाती है उस दिन ओपीडी में वह मरीजों का चेकअप नहीं कर पाते। दिनभर मरीज उनके केबिन के बाहर बैठे रहते हैं। उपचार न मिलने पर हताश होकर मरीज लौट जाते हैं।
एमओ के अलावा अस्पताल में एसएमओ का एक पद, सीनियर डेंटिस्ट का एक पद व डेंटिस्ट का एक पद खाली पड़ा है। जो तीन डेंटिस्ट हैं उनमें से एक डॉक्टर विकास डेपुटेशन पर पंचकूला में आयुष्मान भारत योजना का काम देख रहे हैं। अब 12 नए एमओ की जिले में नियुक्ति हुई है। इनमें से नौ ने ज्वाइन कर लिया है परंतु इनकी ड्यूटी जिला अस्पताल में न होकर शहरी व ग्रामीण सीएचसी, पीएचसी में लगाई गई है।
रोजाना 1500 से अधिक ओपीडी
जब से जिला नागरिक अस्पताल में 200 बेड का नया भवन बना है तब से यहां पर मरीजों की ओपीडी पहले से बढ़ गई है। अब अस्पताल में रोजाना 1500 से 1800 मरीजों की ओपीडी होती है। यदि एक घंटे के लिए भी डॉक्टर नहीं आते तो मरीज परेशान हो जाते हैं। डॉक्टरों को ओपीडी के अलावा सर्जरी के लिए भी समय निकालना पड़ता है। ऐसे में इमरजेंसी में ड्यूटी लगाए जाने से उन पर काम का दबाव बढ़ गया है।
डॉक्टरों के लिए लिखा हुआ है : डॉ. मंजीत सिंह
सिविल सर्जन डॉ. मंजीत सिंह ने बताया कि इमरजेंसी में जो डॉक्टर डेपुटेशन पर आए हुए थे वह वापस भेज दिए हैं, क्योंकि वहां पर मरीजों को परेशानी हो रही थी। जिले में डॉक्टरों की कमी है, कुछ छुट्टी पर चल रहे हैं। इमरजेंसी में ड्यूटी लगाए जाने काे लेकर डॉक्टर आकर मिले थे। डॉक्टरों की कमी को पूरा करने के लिए स्वास्थ्य विभाग को लिखा गया है।