संवाद न्यूज एजेंसी
यमुनानगर। जियो फेसिंग उपस्थिति प्रणाली के खिलाफ स्वास्थ्य संगठनों ने अपना विरोध दर्ज कराया है। जिले में चिकित्सकों व स्वास्थ्यकर्मियों ने काले बिल्ले लगाकर रोष जताया। स्वास्थ्य कर्मचारियों ने काले बिल्ले लगाकर काम किया। कर्मियों का कहना है कि जियो फेसिंग का निर्णय कर्मचारियों के हितों के खिलाफ है।
जिलेभर के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों (पीएचसी), सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों (सीएचसी) और जिला अस्पताल में कार्यरत डॉक्टर, नर्सिंग स्टाफ, फार्मासिस्ट, एएनएम व अन्य स्वास्थ्य कर्मचारियों ने अपने कार्यस्थलों पर काले बिल्ले लगाकर शांतिपूर्ण तरीके से विरोध दर्ज कराया। प्रदर्शनकारियों ने अपने नियमित कार्यों को बाधित किए बिना इस विरोध को सांकेतिक रूप में रखा।
हरियाणा स्वास्थ्य कर्मचारी संघ के जिला प्रधान विपिन गोंदवाल ने बताया कि जियो फेंसिंग प्रणाली कर्मचारियों के मौलिक अधिकारों का उल्लंघन है। वह तकनीक के खिलाफ नहीं हैं, लेकिन किसी भी प्रणाली को लागू करने से पहले जमीनी हकीकत और कर्मचारियों की समस्याओं को ध्यान में रखना जरूरी है। अगर सरकार ने जल्द इस प्रणाली को वापस नहीं लिया तो संघ सामूहिक रूप से आंदोलन को और तेज करेगा।
अगला कदम कार्य बहिष्कार भी हो सकता है, जिसकी जिम्मेदारी सरकार की होगी।जियो फेंसिंग आधारित उपस्थिति प्रणाली कर्मचारियों पर अनावश्यक दबाव डालने का एक तरीका है। यह प्रणाली न केवल कर्मचारियों की निजता का हनन करती है, बल्कि तकनीकी समस्याओं के चलते अक्सर समय की बर्बादी और मानसिक तनाव का कारण भी बनती है।
उन्होंने कहा कि इन आदेशों के तहत डॉक्टर या कर्मचारी जहां पर काम करता है उसके 500 मीटर दायरे में अपने मोबाइल से लोकेशन के साथ अपनी हाजिरी ऑनलाइन लगानी होगी। विभाग की ओर से डॉक्टरों व स्टाफ की ड्यूटी एक से दूसरी जगह पर लगा दी जाती है। ऐसी स्थित में यदि कर्मी दूसरी जगह लगी ड्यूटी पर जाकर हाजिरी लगाएंगे तो उन्हें अनुपस्थित माना जाएगा। जिससे उनका वेतन कटेगा। इसे लागू करने से पहले सुधार की जरूरत है।
महासचिव डॉ. गोल्डी स्याल ने जियो फेंसिंग प्रणाली को तुरंत प्रभाव से रद्द करने, कर्मचारियों की उपस्थिति दर्ज करने के लिए व्यावहारिक और विश्वसनीय विकल्प अपनाने, निर्णयों से पहले कर्मचारियों और संघों से विमर्श करने तथा ग्रामीण क्षेत्रों की नेटवर्क समस्याओं को ध्यान में रखकर निर्णय लेने की मांग की।