संवाद न्यूज एजेंसी
यमुनानगर। ड्राइविंग लाइसेंस बनवाने से पहले परीक्षा देने के लिए आवेदकों को तपती धूप में इंतजार करना पड़ रहा है। आवेदक घंटों इंतजार करते रहते हैं, लेकिन ट्रैफिक पार्क में अधिकारी ही समय पर नहीं पहुंच रहे। इससे आवेदकों में रोष है। ई-दिशा केंद्र जगाधरी का स्टाफ सोमवार को दोपहर सवा एक बजे के बाद ट्रैफिक पार्क में पहुंचा। इसके बाद डेढ़ बजे ड्राइविंग लाइसेंस बनवाने वालों की परीक्षा ली जा सकी। जब ट्राई ली गई तो बाहर वाहनों की लंबी कतार लग चुकी थी।
जिन लोगों को लाइट व्हीकल जैसे बाइक, कार चलाने का ड्राइविंग लाइसेंस लेना होता है उन्हें ई-दिशा केंद्र में फाइल जमा कराने के बाद वाहन पर ट्राई देनी होती है। यह ट्राई गांधी नगर थाना परिसर में बने थाना ट्रैफिक पार्क में ली जाती है। इसके लिए दोपहर साढ़े 12 बजे का समय निर्धारित किया हुआ है।
लेटलतीफी लोगों पर भारी पड़ रही है। सोमवार को जब ई-दिशा की क्लर्क ट्राई लेने पहुंची। जहां चालकों को वाहन चलाकर दिखाना था, उस रास्ते के बीच में एक कार खड़ी मिली। इस कार के आगे-पीछे नंबर भी नहीं था। काफी देर तक इसके मालिक का भी पता नहीं चला। जब कार नहीं हटी तो निर्धारित रूट से लेकर दूसरी सड़क से ली गई।
जब लोग ड्राइविंग लाइसेंस के लिए वाहन की ट्राई देते हैं तो कैमरे से रिकॉर्डिंग करनी होती है। इससे निष्पक्षता बनती रहती है। परंतु ट्रैफिक पार्क में ट्राई की रिकॉर्डिंग कैमरे के बजाय मोबाइल से की जा रही है। मोबाइल में ट्राई में पास न होने वाले लोगों की वीडियो रिकॉर्डिंग को कभी भी डिलीट किया जा सकता है। जिससे निष्पक्षता नहीं आती।
डीएल देने के लिए जिस जगह पर ट्राई ली जा रही है वहां खामियों की भरमार है। वाहनों की ट्राई के लिए जो रूट बनाया गया है उसके सारे डिवाइडर टूटे पड़े हैं। जब से ट्रैफिक पार्क बना है तब से लेकर आज तक इनकी मरम्मत ही नहीं कराई गई। इतना ही नहीं रास्ते में हाई मस्ट लाइट का टावर लगा हुआ है। इस टावर को भी आज तक दूसरी जगह शिफ्ट नहीं किया गया। इस टावर के पास से निकलने से पहले चालक को पहले कई बार अपनी कार पीछे करनी पड़ती है तब जाकर इसके पास से निकला जा सकता है।
करते हैं वेब कास्टिंग : एसडीएम
एसडीएम जगाधरी सोनू राम ने बताया कि सोमवार को क्लर्क ई-दिशा में कार्य अधिक होने के कारण मौके पर थोड़ा देरी से पहुंची थी। मौके पर एक अज्ञात गाड़ी खड़ी होने के चलते भी ट्राई लेने में देरी हुई। मोबाइल से रिकॉर्डिंग के अलावा सीसीटीवी से वेब कॉस्टिंग कर दी जाती है। ट्राई स्थल की कमियां जांच करवा कर दूर कराई जाएंगी।