जगाधरी। दो दिन अमावस्या के कारण लोगों में दिवाली मनाने पर संशय है। कई वीरवार तो कई लोग शुक्रवार की दिवाली मनाने को लेकर चर्चा कर रहे हैं। वहीं, सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे विभिन्न संदेशों से इसे लेकर आशंका पर चर्चा और ज्यादा बढ़ गई है। ज्योतिषाचार्यों का कहना है कि दिवाली 31 अक्टूबर दिन वीरवार को ही मनाई जाएगी। आध्यात्मिक विद्वानों का कहना है कि दिवाली भारतीय संस्कृति का सबसे बड़ा पर्व है। यह आध्यात्मिक दृष्टि से बहुत ही महत्वपूर्ण हैं। जिसकी गणना नक्षत्रों व पंचांग के अनुसार की जाती है।
वहीं, सरकारी अवकाश भी 31 अक्टूबर का निर्धारित है। ऐसे में अधिकतर लोग 31 को ही दिवाली मना रहे हैं। ज्योतिषाचार्य राम कृष्ण, श्याम सुंदर, विपिन शर्मा ने कहा कि कार्तिक पूर्णिमा की अमावस्या की रात को दिवाली मनाई जाती है।इस बार अमावस्या दो दिन पड़ रही है। परंतु अमावस की रात एक ही है। शास्त्रों के विधान के अनुसार दिवाली अमावस की रात को मनाई जानी है। ऐसे में वीरवार की रात को ही दिवाली मनाई जाएगी।उन्होंने बताया कि 31 अक्टूबर को शाम 6:54 बजे से 8:33 बजे के बीच है, जो प्रदोष काल शाम 6 बजकर 02 मिनट से 8 आठ बजकर 33 मिनट तक होगा।इस बीच वृषभ काल शाम 6:54 बजे से 8:54 बजे तक के साथ संरेखित है, जिससे पूजा का महत्व बढ़ जाता है। ऐसे में शाम छह बजकर 25 मिनट से लेकर रात 8 बजकर 20 मिनट के बीच लक्ष्मी पूजन करना विशेष फलदायी रहेगा।वहीं, ज्योतिषाचार्य पंडित सुरेश शास्त्री ने बताया कि दिवाली एक नवंबर को मनाई जाएगी। चूंकि एक नवंबर को पूरा दिन अमावस रहेगी। जो एक नवंबर को पांच बजकर 52 मिनट पर समाप्त होगी। इस समय तक सूर्य अस्त हो जाएगा। ऐसे में पंचांग के अनुसार दिवाली एक नवंबर को मनाई जाएगी। सरकारी अवकाश के कारण दिवाली अधिकांश लोग वीरवार को मना रहे हैं। परंतु लोग एक नवंबर को भी दिवाली मना रहे हैं।
दिवाली पर लक्ष्मी पूजा का महत्व
बूड़िया निवासी पंडित ललित शर्मा ने बताया कि दिवाली वाले दिन शाम व रात को पूजा का विधान है। उन्होंने बताया कि पुराणों के अनुसार कार्तिक मास की अमावस्या की रात देवी लक्ष्मी स्वयं धरती पर आती हैं और प्रत्येक घर में विचरण करती हैं। इस दौरान जो घर स्वच्छ और प्रकाशवान होता है, वहां देवी लक्ष्मी ठहर जाती हैं। इसलिए दिवाली से पहले ही घरों की सफाई की जाती है। इससे देवी लक्ष्मी को प्रसन्न किया जा सके। दिवाली वाले दिन कुबेर देवता की पूजा भी होती है।
लक्ष्मी पूजा की विधि
पंडित ललित ने बताया कि दिवाली पर लक्ष्मी पूजा से पहले पूरे घर की सफाई कर करें। घर में गंगाजल का छिड़काव करें। घर अच्छे से सजाएं और मुख्य द्वार पर रंगोली बना लें। पूजा स्थल पर एक चौकी रखें और उस पर लाल कपड़ा बिछाकर वहां देवी लक्ष्मी और भगवान गणेश की प्रतिमा स्थापित करें।
चौकी के पास जल से भरा कलश रख दें। मां लक्ष्मी और गणेश की प्रतिमा पर तिलक लगाएं और उनके समक्ष घी का दीपक जलाएं। दीपक जलाकर उन्हें जल, मौली, गुड़, हल्दी, चावल, फल, अबीर-गुलाल आदि अर्पित करें।
इसके बाद देवी सरस्वती, मां काली, श्री हरि और कुबेर देव की विधि विधान पूजा करें। महालक्ष्मी पूजा के बाद तिजोरी, बहीखाते और व्यापारिक उपकरणों की पूजा करें। अंत में माता लक्ष्मी की आरती जरूर करें और उन्हें मिठाई का भोग लगाएं। प्रसाद घर-परिवार के सभी सदस्यों में बांटें।