संवाद न्यूज एजेंसी
रादौर। शहर की यमुना गली स्थित श्री राधा कृष्ण मंदिर में आयोजित पांच दिवसीय श्रीकृष्ण कथा मंगलवार को पांचवें दिन भी आचार्य पं. भगवती प्रसाद शुक्ल ने भगवान श्रीकृष्ण की भक्ति का महत्व बताया। उन्होंने कहा कि भगवान केवल निष्काम भक्ति से ही प्रसन्न होते हैं।
उन्होंने बताया कि धन, बल, विद्या या ऊंचे कुल से भगवान की कृपा प्राप्त नहीं होती, बल्कि भक्त के भाव और समर्पण को देखकर प्रभु प्रसन्न होते हैं। भगवान के लिए भक्त का प्रेम और विश्वास सबसे महत्वपूर्ण होता है। उन्होंने उदाहरण देते हुए बताया कि ध्रुव की आयु, गजेंद्र की विद्या, सुदामा का धन, कुब्जा का रूप, विदुर का वंश और उग्रसेन का बल कोई विशेष नहीं था, लेकिन उनकी सच्ची भक्ति के कारण भगवान ने उन्हें अपना आशीर्वाद प्रदान किया।
उन्होंने कहा कि जो व्यक्ति ईश्वर के प्रति एकनिष्ठ भाव रखता है और अपने कर्मों को भगवान को समर्पित करता है, वही जीवन में वास्तविक शांति और आनंद प्राप्त करता है। भक्ति मनुष्य के अहंकार को समाप्त कर उसे प्रभु के निकट ले जाती है। कथा के दौरान आचार्य भगवती प्रसाद शुक्ल ने मां लक्ष्मी के स्वरूप का भी वर्णन किया। उन्होंने कहा कि भगवान विष्णु के साथ लक्ष्मी जी की पूजा करने का विशेष महत्व है।
भक्तों को धन को जीवन का अंतिम लक्ष्य न मानकर उसका सदुपयोग करते हुए ईश्वर के प्रति समर्पण का भाव रखना चाहिए। कथा के दौरान मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं ने भजनों और भगवान श्रीकृष्ण की लीलाओं का आनंद लिया। आयोजन में पुष्पेंद्र मिश्रा, सुरेश शुक्ला, अश्वनी गुप्ता, रविंद्र शर्मा, रोहित गुप्ता, विनोद सोनी, संजय शर्मा, अमित गुप्ता, संजीव चौहान, नीशू चौहान सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे।