संवाद न्यूज एजेंसी
यमुनानगर। जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने एक महत्वपूर्ण फैसले में कार-24 सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड को 51 हजार रुपये मुआवजा और 11 हजार रुपये मुकदमा खर्च देने का आदेश दिया है। आयोग ने यह भी निर्देश दिया कि 45 दिनों के भीतर आरसी ट्रांसफर सुनिश्चित किया जाए। आदेश का पालन नहीं करने परसात प्रतिशत वार्षिक ब्याज भी देना होगा।
आयोग के सहायक रजिस्ट्रार नीरज वालिया ने बताया कि रादौर की वीआईपी कॉलोनी निवासी करण चानन ने दायर शिकायत में आयोग को बताया कि उसने अपनी शेवरले क्रूज एलटीजेड कार एक अप्रैल 2021 को कार-24 के जरिए 1.50 लाख रुपये में बेची थी। कंपनी ने सेवा शुल्क काटकर 1,45,870 रुपये का भुगतान किया था।
वाहन सौंपने की रसीद और विक्रेता सुरक्षा नीति भी जारी की गई थी। कार-24 ने आश्वासन दिया था कि वाहन की आरसी 120 से 180 दिनों के भीतर नए खरीदार के नाम ट्रांसफर करा दी जाएगी। करण ने आयोग को बताया कि बाद में जब उन्होंने ऑनलाइन रिकॉर्ड चेक किया तो पता चला कि उनकी बेची गई कार के दो चालान हो चुके हैं और दो साल चार महीने बाद भी वाहन उनके नाम पर ही दर्ज है।
उन्होंने कई बार कंपनी से संपर्क किया, लेकिन कोई संतोषजनक जवाब नहीं मिला। इसके बाद अगस्त 2023 में कानूनी नोटिस भेजा गया, मगर कंपनी ने केवल औपचारिक जवाब देकर मामले को टाल दिया। वहीं कार-24 की ओर से आयोग में दलील दी गई कि कंपनी केवल खरीदार और विक्रेता के बीच मध्यस्थ की भूमिका निभाती है। कंपनी ने कहा कि वाहन को न्यू शिव मोटर्स नामक डीलर ने खरीदा था और आरसी ट्रांसफर कराने की जिम्मेदारी उसी की थी। कंपनी ने यह भी कहा कि वाहन से जुड़े सभी चालान निपटाए जा चुके हैं और उसके खिलाफ सेवा में कमी का कोई मामला नहीं बनता। सुनवाई के दौरान आयोग ने पाया कि विरोधी पक्ष अपने दावों के समर्थन में कोई ठोस दस्तावेज पेश नहीं कर सका।
रिकॉर्ड में उपलब्ध विक्रेता सुरक्षा नीति से स्पष्ट है कि वाहन का स्वामित्व 120-180 दिनों के भीतर ट्रांसफर होना चाहिए था। आयोग ने अपने आदेश में कहा कि शिकायतकर्ता और कार24 के बीच सीधा लेनदेन हुआ था। कंपनी अपनी जिम्मेदारी किसी डीलर या चैनल पार्टनर पर डालकर जवाबदेही से बच नहीं सकती।
आयोग ने माना कि यदि कंपनी के प्लेटफॉर्म के जरिए वाहन बेचा गया तो अंतिम खरीदार के नाम आरसी ट्रांसफर सुनिश्चित करना भी कंपनी का दायित्व था। आयोग ने यह भी टिप्पणी की कि लगभग पांच साल बीत जाने के बाद भी वाहन शिकायतकर्ता के नाम पर दर्ज रहना गंभीर लापरवाही को दर्शाता है।
आयोग ने आदेश में कहा कि कार-24 का रवैया उपभोक्ता हितों के प्रति लापरवाह रहा है। इसलिए कंपनी को शिकायतकर्ता को 51 हजार रुपये मुआवजा और 11 हजार रुपये मुकदमा खर्च देना होगा। साथ ही वाहन का स्वामित्व अंतिम खरीदार के नाम ट्रांसफर कराने के निर्देश भी दिए गए हैं।