संवाद न्यूज एजेंसी
जगाधरी। पंचनद शोध संस्थान की जिला इकाई की ओर से महर्षि वाल्मीकि के विचारों की प्रासंगिकता विषय पर संगोष्ठी करवाई गई। कार्यक्रम सेक्टर-17 में अर्बन एस्टेट वेलफेयर एसोसिएशन के नवनियुक्त अध्यक्ष देवेंद्र राणा के नेतृत्व में करवाया गया। संगोष्ठी में राजकीय महाविद्यालय रादौर के एसोसिएट प्रो. डॉ. संजीव गांधी मुख्य वक्ता रहे। उन्होंने कहा कि महर्षि वाल्मीकि की दी सामाजिक समरसता, सद्भाव व मानवता जैसे नैतिक मूल्यों की आज भी उतनी प्रासंगिकता है। उनके विचार व आदर्श हमें समता मूलक समाज की स्थापना की प्रेरणा देते हैं। उन्होंने कहा सभी को महर्षि वाल्मीकि के महान दृष्टिकोण एवं उनके द्वारा दी गई शिक्षा को अपने व्यवहार में अपने का संकल्प लेना होगा।
पंचनद शोध संस्थान अध्यक्ष सुरेश पाल ने महर्षि वाल्मीकि जयंती की शुभकामनाएं दीं और कहा कि महर्षि वाल्मीकि जमीन की सतह से धर्म की पराकाष्ठा करने वाले एक मर्मज्ञ महात्मा थे। उन्होंने महाकाव्य रामायण की रचना कर समाज को सत्य, कर्तव्य, निष्ठा व सन्मार्ग पर चलने की प्रेरणा दी। रामायण हमें व्यक्ति की वास्तविक पहचान, परिवार के वास्तविक महत्व, समाज की पवित्रता व मानवीय मूल्य का महत्व का संदेश देती है। सेवानिवृत प्राचार्य मोहनलाल व सतीश कांबोज ने कहा कि श्रीराम का चरित्र इतना उदार और ऊंचा है कि वे रावण कि मृत्यु के बाद विभीषण को उसके शरीर संस्कार का उपदेश देते हैं। श्रीराम कहते हैं कि शत्रु की मृत्यु से बैर का अंत हो जाता है। भरत की राज्य पद के प्रति अनाशक्ति, लक्ष्मण की सेवा व हनुमान की स्वामी भक्ति यह तीनों जीवन के सर्वोच्च आदर्श रामायण में हैं।
प्रधान देवेंद्र राणा ने कहा कि महर्षि वाल्मीकि किसी एक के नहीं बल्कि सभी के लिए पूज्यनीय हैं। उनकी सबसे बड़ी सीख बुराई पर हमेशा अच्छाई की जीत है। संस्थान महासचिव डॉ. हेमंत मिश्रा ने पंचनद शोध संस्थान के उद्देश्यों के बारे बताया। कार्यक्रम का संचालन राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय बूढेडी प्राचार्य कृष्णलाल सैनी ने किया। इस दौरान भारत स्वाभिमान ट्रस्ट जिला प्रभारी सुंदरलाल, उधम सिंह ब्लड बैंक निदेशक बलवान सिंह कल्याण, मीडिया प्रभारी कर्ण सिंह कांबोज, डॉ. राजेश भारद्वाज, प्राचार्य पिरथी सैनी, बलविंद्र सैनी, पतंजलि योग समिति के पूर्व प्रभारी महेंद्र सिंह सहित अन्य उपस्थित रहे।