संवाद न्यूज एजेंसी
यमुनानगर। बारिश के मौसम में बच्चों की सेहत पर बीमारियों का खतरा बढ़ गया है। मुकंद लाल जिला नागरिक अस्पताल की बाल रोग ओपीडी में इन दिनों डायरिया से पीड़ित बच्चों की संख्या लगातार बढ़ रही है। अस्पताल में आने वाले कुल बच्चों के मरीजों में करीब 45 प्रतिशत केस डायरिया से संबंधित सामने आ रहे हैं।
नागरिक अस्पताल में रोजाना करीब 110 से 140 बच्चों की ओपीडी होती है। इनमें 45 से 50 बच्चे डायरिया, दस्त, उल्टी और पेट संबंधी समस्या से पीड़ित पहुंच रहे हैं। हालांकि चिकित्सकों के अनुसार ये सभी मामले किसी एक क्षेत्र विशेष से नहीं हैं, बल्कि शहर और आसपास के अलग-अलग इलाकों से बच्चे उपचार के लिए आ रहे हैं। छोटे बच्चों में यह बीमारी अधिक तेजी से असर डाल सकती है, क्योंकि बार-बार दस्त होने से शरीर में पानी और लवण की कमी हो जाती है।
समय पर उपचार न मिलने पर स्थिति गंभीर भी हो सकती है। डिप्टी सिविल सर्जन डॉ. दिव्या मंगला का कहना है कि बच्चों में डायरिया के लक्षण दिखाई देने पर लापरवाही नहीं बरतनी चाहिए। बच्चे को पर्याप्त मात्रा में तरल पदार्थ देते रहें और डॉक्टर की सलाह के अनुसार उपचार कराएं। ओआरएस का घोल डायरिया के दौरान शरीर में पानी और जरूरी लवण की कमी को पूरा करने में मदद करता है।
डायरिया होने का कारण
डायरिया मुख्य रूप से दूषित पानी और खराब खान-पान के कारण होता है। बारिश के मौसम में पानी में बैक्टीरिया और वायरस की मात्रा बढ़ सकती है, जिससे संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है। खुले में बिकने वाले खाद्य पदार्थ, बासी खाना, बिना हाथ धोए भोजन करना और गंदगी के संपर्क में आने से बच्चों में डायरिया हो सकता है। छोटे बच्चों की रोग प्रतिरोधक क्षमता कम होने के कारण वे जल्दी इसकी चपेट में आते हैं।
डायरिया से कैसे करें बचाव
डायरिया से बचाव के लिए बच्चों को साफ पानी पिलाएं और भोजन से पहले हाथ साबुन से धुलवाएं। घर में बना ताजा और पौष्टिक भोजन ही दें। बाजार के खुले खाद्य पदार्थों से परहेज करें। बच्चों के आसपास साफ-सफाई रखें और गंदे हाथ मुंह तक न ले जाने दें। दस्त शुरू होने पर शरीर में पानी की कमी न होने दें और ओआरएस का घोल देते रहें। गंभीर लक्षण दिखाई देने पर तुरंत चिकित्सक से संपर्क करें।