संवाद न्यूज एजेंसी
जगाधरी। हनुमान गेट स्थित दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान आश्रम में साप्ताहिक सत्संग का आयोजन किया गया। जिसमें साध्वी सुमान्या भारती ने कहा कि ब्रह्म ज्ञान और प्रभु भक्ति ही देशभक्ति की आधारशिला है जो स्वामी विवेकानंद, योगानंद परमहंस, दयानंद सरस्वती, शिवाजी और मीराबाई जैसे निष्ठावान देश भक्तों को जन्म देती है।
साध्वी ने कहा कि यह आध्यात्मिक जागृति ही है जो भगत सिंह, चंद्रशेखर आजाद और राम प्रसाद बिस्मिल जैसे क्रांतिकारियों के भीतर देश के लिए मर मिटने का जज्बा पैदा करती है। यदि हमारे जीवन में गुरु नहीं है तो हम मनुष्यत्व से भी वंचित रह जाते हैं क्योंकि वह गुरु सत्ता ही है जो अपने तपोबल एवं दिव्य प्रेरणाओं के द्वारा हमारी अंतर आत्मा को उसके कर्तव्यों के प्रति जागरूक करते हैं।
ब्रह्मज्ञान की ध्यान साधना और गुरु भक्ति के द्वारा ही एक साधारण व्यक्ति में वह परिवर्तन घटित होता है जिसके द्वारा वह मनुष्यत्व से देवत्व की यात्रा को सुगमता से तय करता है। केवल किसी बाहरी प्रयास अथवा अपने ही पुरुषार्थ के द्वारा परिवर्तन कदापि संभव नहीं है क्योंकि व्यक्ति कितना भी चिंतनशील या मननशील क्यों न हो फिर भी गुरु के अभाव में वह अपने अच्छे विचारों को कभी व्यावहारिक रूप से क्रियान्वित नहीं कर पाता।
सुमान्या भारती ने कहा कि हमारे व्यक्तित्व, आचरण और हमारी विचारधारा को केवल वही परिवर्तित कर सकता है जिसकी पहुंच हमारी अंतरात्मा तक हो और वह केवल गुरु सत्ता ही है जो अपने तपोबल एवं दिव्य आभा मंडल के द्वारा हमें पूर्ण रूप से परिवर्तित कर देने का सामर्थ्य रखते हैं।
जब परमात्मा को अपनी जीव आत्माओं पर दया आती है तब वे उन के उद्धार हेतु धरती पर कभी आंशिक रूप में तो कभी पूर्ण रूप में अवतरित होता है। गुरु वह शक्ति है जो एक साधारण मानव से दिव्य व्यक्तित्व को गढ़ने के लिए सामर्थ्यवान होते है लेकिन उसके लिए साधक का पूर्ण समर्पण होना अति आवश्यक है क्योंकि समर्पण के अभाव में निर्माण क्रिया अधूरी रह जाती है।