यमुनानगर जिला मुख्यालय से लगभग 25 किलोमीटर दूर प्रसिद्ध ऐतिहासिक व धार्मिक स्थल तीर्थराज कपाल मोचन विभिन्न वर्गों, धर्मों और जातियों की एकता का प्रतीक है। 14 नवंबर की मध्यरात्रि रात 12 बजे के बाद कार्तिक पूर्णिमा के अवसर पर होने वाले शाही स्नान को लेकर मेला परिसर में दूर-दूर से काफी संख्या में श्रद्धालु पहुंच रहे हैं। उधर, बुधवार को श्री कपालमोचन सरोवर पर स्थित गऊ-बच्छा मंदिर पर माथा टेकने वाले श्रद्धालुओं की भारी भीड़ रही। माथा टेकने वाले श्रद्धालुओं की संख्या अधिक होने से लंबी कतारें लगी रही। हालांकि व्यवस्था को बनाए रखने के लिए मार्ग में लकड़ी के पोल भी लगाए गए हैं, किंतु इसके बाद भी बहुत से श्रद्धालुओं में पहले माथा टेकने की होड़ मची रही।
वहीं, मेला प्रशासक एसडीएम बिलासपुर जसविंद्र सिंह गिल के मुताबिक बुधवार को करीब चार लाख से अधिक श्रद्धालु स्नान कर सकते हैं। श्रद्धालु मोक्ष की कामना से पवित्र सरोवरों क्रमश: कपाल मोचन सरोवर, ऋण मोचन सरोवर व सूरजकुंड सरोवर में स्नान करते हैं। स्नान के बाद श्रद्धालुओं ने सरोवरों किनारे दीये जलाकर मन्नतें मांगते हैं। साथ, ही कपालमोचन में गुरुद्वारा पहली एवं दसवीं पातशाही, गऊ बच्छा मंदिर, गुरु रविदास मंदिर, सूरजकुंड कुंड पर बाबा दूधाधारी की समाधि पर माथा टेकते हैं।
बता दें कपालमोचन यह हिंदुओं और सिखों के लिए तीर्थ यात्रा का एक प्राचीन स्थान है। इसलिए, कहा जाता है सारे तीर्थ बार-बार, कपालमोचन एक बार। जहां पर केवल एक बार आने मात्र से लोगों के कष्ट पाप दूर हो जाते हैं। यहां भगवान राम, श्रीकृष्ण पांडव युद्ध के बाद एक बार ही आए। पुराणों में मान्यता है कि उनके पाप भी यहां के ऋणमोचन में स्नान करने से एक ही बार में धूल गए थे।