संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। खेड़ा मंदिर प्रांगण में श्रीमद्भागवत कथा के दौरान वीरवार को भगवान श्रीकृष्ण का जन्मोत्सव मनाया गया। कथा व्यास हरिशरण दास ने प्रहलाद चरित्र व वामन अवतार प्रसंग सुनाया। कथा में भगवान का जन्म हुआ तो पूरा पंडाल नंद के आनंद भयो जय कन्हैया लाल की जयघोष से गूंज गया। श्रद्धालुओं ने नाच गाकर खुशी मनाई।
कथा व्यास हरिशरण दास ने कहा कि जब पृथ्वी पाप के बोझ से दबने लगती है और पाप बढ़ जाता है तब श्रीहरि अवतार लेते हैं। वे पाप और पापी का नाश कर पुन: धर्म की स्थापना करते हैं। मथुरा के राजा कंस ने पाप का आचरण करते हुए अपने ही पिता को कारावास में डाल सत्ता हथिया ली व प्रजा पर अत्याचार किया। बहन देवकी व जीजा वासुदेव को कारावास में बंद कर दिया।
जन्म के समय श्रीहरि की कृपा से कारावास के द्वार खुल गए व मायावश वासुदेव भगवान कृष्ण को उफनती यमुना को पार कर सकुशल बाबा नंद के घर छोड़ देते हैं तथा बाबा नंद के घर में पुत्र होने का समाचार पाकर पूरे नंद में आनंद छा जाता है।
डॉ. स्वामी धराचार्य महाराज ने कहा कि कलयुग में भागवत कथा सुनने मात्र से हर प्राणी को मोक्ष की प्राप्ति होती है। भागवत कथा एक ऐसी है जिसे ग्रहण करने मात्र से ही मन को शांति मिलती है। भागवत कथा सुनने से अहंकार का नाश होता है। भागवत कथा के आयोजन से श्रद्धालुओं में खुशी का माहौल है।
जब धरती पर चारों ओर त्राहि-त्राहि मच गई, चारों ओर अत्याचार, अनाचार का साम्राज्य फैल गया तब भगवान श्रीकृष्ण ने देवकी के आठवें गर्भ के रूप में जन्म लेकर कंस का संहार किया। इस अवसर पर उन्होंने भगवान श्रीकृष्ण की विभिन्न बाल लीलाओं का वर्णन किया। कथा में सरपंच प्रतिनिधि पंकुश खुराना, जय मलिक, देवेंद्र अरोड़ा मुख्यातिथि रहे। इस दौरान प्रधान अनिल कक्कड़, राकेश बेदी, अशोक धीमान, नरेश वर्मा, राजेश सिंगला, रवि भूषण, जय मलिक, देवेंद्र अरोड़ा सहित अन्य श्रद्धालु मौजूद रहे।