संवाद न्यूज एजेंसी
व्यासपुर। दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान आश्रम व्यासपुर में आयोजित साप्ताहिक सत्संग सुनने के लिए भीड़ उमड़ पड़ी। इस दौरान श्रद्धालुओं को भक्ति मार्ग का महत्व समझाया गया। कार्यक्रम में आशुतोष महाराज के शिष्य स्वामी कृष्ण कुमारानंद ने भक्ति पथ में आने वाले अवरोधों पर विस्तृत व्याख्यान दिया।
उन्होंने कहा कि जब कोई भक्त दृढ़ संकल्प के साथ भक्ति मार्ग पर चलता है, तो उसके सामने अनेक बाधाएं आती हैं, जो उसे विचलित करने का प्रयास करती हैं। इन अवरोधों से बचने का एकमात्र उपाय प्रभु के चरणों में सच्चा समर्पण है। उन्होंने कहा कि एक साधारण व्यक्ति भी अहंकार त्यागकर और श्रद्धा के साथ प्रभु के चरणों में समर्पित होकर सच्चा भक्त बन सकता है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि समर्पण का अर्थ संसार त्यागना या संन्यासी वेश धारण करना नहीं है, बल्कि अपने मन, वचन और कर्म को प्रभु के प्रति समर्पित करते हुए अपने दायित्व निभाना ही वास्तविक भक्ति है। जिस हृदय में प्रभु का वास होता है, उसे कोई भी बाहरी परिस्थिति विचलित नहीं कर सकती।
उन्होंने संतों और महापुरुषों की संगति को भक्ति मार्ग में आवश्यक बताते हुए कहा कि संसार नश्वर है, जबकि परमात्मा का नाम शाश्वत है। इस सत्य को समझने के लिए सत्संग और संतों का मार्गदर्शन अत्यंत जरूरी है। उन्होंने यह भी कहा कि गुरु की शरण में गए बिना आत्मानुभूति संभव नहीं है। कार्यक्रम के अंत में साध्वियों ने भजनों की मधुर प्रस्तुति देकर वातावरण को भक्तिमय बना दिया।