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डेवलपमेंट चार्ज के विरोध में एकजुट हुए पक्ष-विपक्ष के पार्षद

Tue, 03 Jan 2017 12:18 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, यमुनानगर।
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road - फोटो : यमुनानगर
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अमर उजाला ब्यूरो
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यमुनानगर/जगाधरी वर्कशाप। दो दशक से भी अधिक पहले बसी शहर की सौ से अधिक कॉलोनियों के वैध न होने से करीब डेढ़ लाख की आबादी विकास की बांट जोह रही है। सरकार द्वारा इन्हें वैध करने के लिए रखी डेवलपमेंट चार्ज की शर्त लोगों को रास नहीं आ रही है, जिसको लेकर संबंधित वार्ड पार्षद एकजुट हो गए हैं। इस संबंध में पार्षद सीएम मनोहरलाल खट्टर को चिट्ठी लिखेंगे। इसमें डेवलपमेंट चार्ज की शर्त हटाने के साथ कॉलोनियों को वैध करने हेतु नियमों को आसान बनाने की मांग होगी। साथ ही जिले के विधायकों के समक्ष और हाउस मीटिंग में यह मुद्दा उठाने का मन बना चुके हैं।

नगर निगम के सर्वे के मुताबिक ट्विन सिटी में करीब 217 कालोनियां अवैध हैं। इसमें निगम की ओर से 105 कालोनियों को वैध करने के लिए सूची प्रदेश सरकार को भेजी गई थी। इस पर सरकार की ओर से कॉलोनियों को एक वर्ष के लिए वैध करने के लिए 50 प्रतिशत डेवलपमेंट की शर्त रखी गई है। साथ ही विकास कार्यों के लिए संबंधित कॉलोनियों में गठित कमेटियां और निगम के ज्वाइंट बैंक अकाउंट खोलने का प्रावधान रखा है।
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डेवलपमेंट चार्ज के विरोध में लोगों ने किया बैठक में हंगामा
नगर निगम में अवैध कॅालोनियों को वैध करने से पहले रायशुमारी बनाने के लिए बीती 28 दिसंबर को जिला सचिवालय में बैठक हुई। इसमें पार्षदों के साथ अवैध कॉलोनियों के लोगों को भी शामिल किया गया। मगर लोगों ने डेवलपमेंट चार्ज की शर्त पर हंगामा किया था। लोगों के मुताबिक डेवलपमेंट चार्ज की शर्त सही नहीं है। वह कई सालों से रह रहे हैं और प्रापर्टी टैक्स का भुगतान कर रहे हैं। ऐसे में सरकार को बिना शर्त इन कॉलोनियों को वैध करना चाहिए।
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डेढ़ लाख की आबादी है प्रभावित
 नगर निगम का गठन मार्च 2010 में हुआ था, जिसमें यमुनानगर व जगाधरी तथा 41 पंचायतों को शामिल किया गया था। नगर निगम के आउटर क्षेत्र की अधिकतर कॉलोनियों अवैध हैं, जिनमें विकास के नाम पर कुछ भी नहीं हुआ। इन कॉलोनियों में कच्ची गलियां हैं और मूलभूत सुविधाएं भी नहीं हैं। सबसे अधिक परेशानी गंदे पानी की निकासी न होने से होती है। इसमें करीब डेढ़ लाख की आबादी रहती है। हालांकि निगम की कई अवैध कॉलोनियों में अधिकारियों की ओर से अपने स्तर पर विकास कार्य भी करवा दिए गए। मगर इसके बाद भी अधिकतर कॉलोनियों के लोग पेयजल, निकासी, बिजली, सड़क जैसी सुविधाओं के अभाव में नरकीय जीवन जी रहे हैं।
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सीएम को लिखेंगे पत्र: चौहान
नगर निगम के वार्ड नंबर 14 की पार्षद निर्मल चौहान कहती है कि अधिकतर अवैध कालोनियों में नीचे तबके के लोग ही रहते हैं। इसलिए सरकार को शर्तें सरल करके उन्हें वैध करना चाहिए। जिससे इन कालोनियों में भी विकास कार्य करवा जाए सके। नियमों में बदलाव को लेकर सीएम को पत्र लिख जाएगा। इसके लिए सभी पार्षदों के साथ बात की जाएगी। जिले में चारों विधायक भाजपा के हैं और प्रदेश में भी भाजपा की सरकार है। विधायकों से मिल कर विकास की मांग की जाएगी। उन्होंने कहा कि सरकार को कालोनी को वैध करने के लिए अजीब अजीब शर्तें नहीं लगानी चाहिए। सरकार को अवैध कालोनी काटने पर ही अंकुश लगाना चाहिए। गरीब लोग ही इन कालोनी में मकान लेते हैं। अवैध कालोनी के लोग भी प्रापर्टी टैक्स देते हैं।
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पार्षद अपने स्तर पर करेंगे बैठक: जावला
नगर निगम के वार्ड नंबर 17 की पार्षद सुशल जावला का कहना है कि जल्द ही इस संबंध में पार्षद अपने स्तर पर बैठक करेंगे। जिसमें कोई न कोई निर्णय लिया जाएगा। उनका कहना है कि कालोनियों वैध न होने से बड़ी समस्या आ रही है। उनके पास फंड भी हैं, लेकिन काम नहीं करवा पा रहे हैं। अवैध कालोनियों में सुविधाएं नहीं और लोग परेशान हो रहे हैं। है और आमजन नाराज हो रहे हैं। पिछली सरकार में उनके वार्ड में नवाब कालोनी व जैन कालोनी को अप्रुवड किया था। अब उन दोनों कालोनियों में विकास करवा दिया गया है। यदि सरकार अन्य कालोनियों को भी अवैध कर दे तो उनमें भी विकास करवा दिया जाएगा।  
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हाउस में प्रस्ताव पारित कर भेजा जाएगा: राणा
नगर निगम के वार्ड नंबर 19 के पार्षद नीरज राणा का कहना है कि शहर के विकास के लिए कालोनियों को वैध किया जाना चाहिए। हाउस की बैठक में नियमों को आसान बनाने का प्रस्ताव पारित करके सरकार को भेजा जाएगा। इसके अलावा जरुरत पड़ी तो प्रदेश के मुख्यमंत्री से भी मिला जाएगा और लोगों की प्रतिक्रिया से अवगत करवाया जाएगा। उनका कहना है कि अवैध कालोनी के लोगों से प्रापर्टी टैक्स ले रहा है, ऐसे में उन्हें सुविधाएं भी दी जानी चाहिए। कालोनी को वैध करने में कड़ी शर्तें नहीं लगानी चाहिए। बल्कि अवैध कालोनी विकसित न हो, इस पर प्रशासन व सरकार को ध्यान देना चाहिए।  
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