संवाद न्यूज एजेंसी
यमुनानगर। नगर निगम के मुख्य व बड़े कामों में एक शहर की सफाई है। सफाई के कामों पर हर माह दो से ढाई करोड़ रुपये से अधिक खर्च है। इस तरह करोड़ों रुपये खर्च से सुधरने के बजाय गत वर्ष में शहर की स्वच्छ सर्वेक्षण में रैंकिंग बिगड़ गई, जो 170 से 51 पायदान नीचे 221 पर रही। इसकी वजह गलियों-सड़कों किनारे, खुले स्थानों व प्लॉटों में बिखरा कचरा भी रहा। यह मुद्दा निगम चुनाव के माहौल में मेयर व पार्षद प्रत्याशियों और लोगों की जुबान पर है।
नगर निगम यमुनानगर-जगाधरी के अंतर्गत 22 वार्डों से रोज 250 से 300 मीट्रिक टन तक कचरा निकलता है। इसके लिए नगर निगम की ओर से डोर टू डोर कचरा उठान का ठेका दिया गया है। पिछले ठेका 26 करोड़ रुपये और चालू वित्तवर्ष में अनुमानित 17 करोड़ रुपये की लागत ठेका हुआ।
इसमें एक ही एजेंसी पर सभी 22 वार्डों से डोर टू डोर कचरा उठान का जिम्मा है। हालांकि निगमायुक्त व अन्य अफसर टिपर बढ़ाने सहित नियमित उठान के लिए एजेंसी को दिशा-निर्देश देने सहित सख्त कार्रवाई कर चुके है। इसके बाद भी निवर्तमान पार्षदों से लेकर कई इलाकों के लोग कचरा उठान नियमित न होने के आरोप चुके हैं।
इसके अलावा गलियों-सड़कों, नाले-नालियों व शौचालय साफ करने, मशीन से मुख्य मार्ग साफ करने और करीब 700 सफाई कर्मियों के वेतन-भत्तों पर भी हर माह करोड़ों रुपये का खर्च है। इसके बाद भी गलियों-सड़कों पर रोज झाड़ू न लगने व उन पर गंदगी व कचरा होने, नाले-नालियां भी साफ न होने से जाम रहने व शौचालयों दयनीय स्थिति में होने के आरोप लोग लगा रहे हैं।
बूड़िया निवासी रजनी शर्मा ने बताया कि कचरा उठान के लिए नगर निगम के वाहन रोज नहीं आते। कई दिन बाद आते हैं। इससे घर पर इकट्ठा कई दिन के कचरे से दुर्गंध व मक्खी मच्छर की परेशानी से दो चार होते हैं। इस तरह सड़ते कचरे से घर में बीमारी फैलने का भी खतरा हो सकता है, इसलिए कचरा उठान के वाहन रोज आने चाहिएं, जिससे क्षेत्र के लोगों का काफी राहत होगी।
रामपुरा निवासी अश्वनी शर्मा ने कहा कि शहर में मुख्य मार्गों पर मशीन वाले वाहन से सफाई के नाम पर खानापूर्ति हो रही है। इस मशीन पर हर माह केवल लाखों रुपये बर्बाद किए जा रहे हैं। क्योंकि मशीन केवल डिवाइडर के एक कोने पर सफाई करती है। इसके अलावा मार्ग के अन्य हिस्से में मिट्ठी व गंदगी रह जाती है। इस मशीन पर आ रहे खर्च पर सफाई कर्मी रखे जाने चाहिए।
विजय कॉलोनी निवासी विकास जैन ने कहा कि हर साल करोड़ों रुपये खर्चने के बाद भी कचरा गलियों-सड़कों किनारे, खुले स्थानों व प्लॉटों में होना व्यवस्था पर सवालिया निशान है। कहीं न कहीं कमी है, तभी ये हालात हैं। इसमें सुधार के लिए निगम अफसरों व आमजन को मिलकर काम करने की जरूरत हैं। ठेकेदार के भरोसे सफाई व्यवस्था डाल देने से कभी सुधार संभव नहीं होगा।
सावनपुरी निवासी पर्यावरण मित्र फाउंडेशन के अध्यक्ष चिराग सिंघल ने बताया कि करोड़ों खर्च करने से काम नहीं होगा, क्योंकि इतने खर्च के बाद भी न सफाई व कचरा उठान और न कचरा निस्तारण की सही व्यवस्था है, क्योंकि सफाई के हर काम की सही निगरानी नहीं है। अफसरों व ठेकेदारों की मिलीभगत का संदेह रहता है, इसलिए संस्थाओं के प्रतिनिधियों से निगरानी करानी चाहिए।
सात वर्षों में स्वच्छता रैंकिंग
वर्ष - रैंक
2017 - 346
2018 - 310
2019 - 218
2020 - 147
2021 - 243
2022 - 170
2023 - 221